दिवाली 2026 के पारंपरिक खेल और आध्यात्मिक स्पर्श वाली पारिवारिक गतिविधियाँ
दिवाली 2026, रोशनी का पर्व, केवल दीयों से घरों को जगमगाने और रंगोली से सजाने भर का नाम नहीं है।

दिवाली 2026, रोशनी का पर्व, केवल दीयों से घरों को जगमगाने और रंगोली से सजाने भर का नाम नहीं है।
दिवाली, रोशनी का पर्व, केवल दीयों से घरों को जगमगाने और रंगोली से सजाने भर का नाम नहीं है। यह एक ऐसा उत्सव है जो सदियों पुरानी परंपराओं, खेलों और गतिविधियों के माध्यम से परिवारों को एक साथ लाता है, जिनका गहरा आध्यात्मिक महत्व है। ये रीतियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं, और हर एक में आनंद, भक्ति और जीवन की सार्थक सीखें गुँथी हुई हैं।
दिवाली उत्सव का आध्यात्मिक सार
खेलों और गतिविधियों में उतरने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि दिवाली की हर परंपरा किसी उच्च उद्देश्य की पूर्ति करती है। यह पर्व भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और राक्षसराज रावण पर उनकी विजय की स्मृति में मनाया जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। दिवाली का हर खेल और हर गतिविधि इसी पवित्र प्रतीक को आगे बढ़ाती है।
दिवाली के पारंपरिक खेल
1. तीन पत्ती
तीन पत्ती शायद दिवाली पर, ख़ासकर लक्ष्मी पूजा की रात, खेला जाने वाला सबसे लोकप्रिय ताश का खेल है। हिंदू मान्यता के अनुसार दिवाली की रात ताश खेलने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और विजेता को पूरे वर्ष समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
आध्यात्मिक महत्व: यह खेल हमें जीवन की अनिश्चितताओं और सीमित जानकारी के साथ समझदारी से निर्णय लेने का महत्व सिखाता है। यह याद दिलाता है कि भाग्य की भूमिका होती है, पर सूझ-बूझ और धैर्य भी उतने ही ज़रूरी हैं।
कैसे खेलें: हर खिलाड़ी को तीन पत्ते बाँटे जाते हैं। खिलाड़ी इस पर दाँव लगाते हैं कि किसके पत्ते सबसे अच्छे हैं, और इस खेल में कौशल, मनोविज्ञान और संयोग — तीनों का मेल होता है।
2. रमी
रमी एक और प्रिय ताश का खेल है जिसका आनंद परिवार दिवाली के मेल-मिलाप में लेते हैं। इसमें खिलाड़ियों को पत्तों को सेट और सीक्वेंस में जमाना होता है।
आध्यात्मिक महत्व: रमी हमें अव्यवस्था से व्यवस्था बनाना, आगे की योजना बनाना और धैर्य का महत्व सिखाती है। यह अपने लक्ष्यों को पाने के लिए अपने जीवन और विचारों को व्यवस्थित करने का एक रूपक है।
पारिवारिक जुड़ाव: रमी खेलने से कई पीढ़ियाँ एक साथ आती हैं — दादा-दादी पोते-पोतियों को दशकों में सीखी अपनी तरकीबें सिखाते हैं।
3. पचीसी (चौपड़)
महाभारत काल से चला आ रहा यह प्राचीन बोर्ड गेम दिवाली पर विशेष महत्व रखता है। कथा है कि दिवाली की रात भगवान शिव और देवी पार्वती ने चौपड़ खेली थी, और जो इस खेल को जीतता है वह आने वाले पूरे वर्ष समृद्ध रहता है।
आध्यात्मिक महत्व: पचीसी के चार मार्ग हिंदू दर्शन में मानव जीवन के चार पुरुषार्थों को दर्शाते हैं: धर्म (सदाचार), अर्थ (धन), काम (सुख) और मोक्ष (मुक्ति)। यह खेल इन लक्ष्यों की ओर जीवन-यात्रा का प्रतीक है।
कैसे खेलें: खिलाड़ी कौड़ियाँ फेंककर (पासे की तरह) अपनी गोटियाँ क्रॉस के आकार वाले बोर्ड पर आगे बढ़ाते हैं।
4. साँप-सीढ़ी (मोक्ष पटम)
मूल रूप से नैतिक शिक्षा के साधन के रूप में बनाया गया यह खेल दिवाली उत्सवों में विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ।
आध्यात्मिक महत्व: सीढ़ियाँ उदारता, श्रद्धा और विनम्रता जैसे सद्गुणों का प्रतीक हैं जो आत्मा को ऊपर उठाते हैं, जबकि साँप क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे दुर्गुणों का प्रतीक हैं जो हमें नीचे खींचते हैं। यह खेल सिखाता है कि अच्छे कर्म स्वर्ग (मोक्ष) की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरे कर्म निम्न योनियों में पुनर्जन्म की ओर।
5. हाउज़ी (तंबोला)
बिंगो जैसा यह खेल कई भारतीय घरों में दिवाली का अभिन्न हिस्सा बन गया है, जो बड़े पारिवारिक जमावड़ों को एक साथ जोड़ता है।
आध्यात्मिक महत्व: यह खेल सजगता और धैर्य सिखाता है। यह याद दिलाता है कि सबको एक जैसे अवसर (अंक) मिलते हैं, पर सफलता उन्हीं को मिलती है जो सतर्क और एकाग्र रहते हैं।
पारंपरिक पारिवारिक गतिविधियाँ
1. रंगोली बनाना
प्रवेश द्वार पर रंग-बिरंगी रंगोली बनाना दिवाली की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है। परिवार मिलकर रंगीन चूर्ण, फूलों या चावल से बारीक आकृतियाँ बनाते हैं।
आध्यात्मिक महत्व: माना जाता है कि रंगोली देवी लक्ष्मी का घर में स्वागत करती है। इसके रंग जीवन की जीवंतता को और ज्यामितीय आकृतियाँ ब्रह्मांडीय व्यवस्था को दर्शाती हैं। मिलकर रंगोली बनाना धैर्य, रचनात्मकता और अतिथियों का आत्मीयता से स्वागत करने का महत्व सिखाता है।
पारिवारिक गतिविधि: रंगोली के अलग-अलग हिस्से परिवार के अलग-अलग सदस्यों को सौंपें। दादा-दादी पारंपरिक आकृतियों का मार्गदर्शन करें और बच्चे उसमें रचनात्मक आधुनिक रंग भरें।
2. दीयों की सजावट और प्रज्वलन
मिट्टी के दीयों को सजाना और उन्हें मिलकर जलाना दिवाली उत्सव का हृदय है।
आध्यात्मिक महत्व: दीया जीवात्मा (आत्मन्) का, तेल हमारी नकारात्मक प्रवृत्तियों का, बाती अहंकार का और लौ उस ज्ञान का प्रतीक है जो अज्ञान को दूर करता है। दीये जलाना हमें अपने भीतर ज्ञान का प्रकाश जगाने की याद दिलाता है।
पारिवारिक गतिविधि: दीया-पेंटिंग का एक सत्र रखें जिसमें परिवार का हर सदस्य अपने दीये सजाए। शाम को सब मिलकर विधिवत दीप प्रज्वलन करें, और बड़े-बुज़ुर्ग छोटों को इसका महत्व समझाएँ।
3. लक्ष्मी पूजा
दिवाली की रात मुख्य पूजा पूरा परिवार मिलकर करता है।
आध्यात्मिक महत्व: देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना समृद्धि को आमंत्रित करती है और बाधाओं को दूर करती है। पूजा अनुशासन, भक्ति और जीवन में मिले आशीर्वादों के प्रति कृतज्ञता सिखाती है।
पारिवारिक सहभागिता: पूजा के दौरान परिवार के सदस्यों को अलग-अलग भूमिकाएँ दें। बच्चे घंटी बजा सकते हैं, किशोर भोग-सामग्री में मदद कर सकते हैं और बड़े मंत्रों व प्रार्थनाओं का नेतृत्व कर सकते हैं।
4. कथा-वाचन सत्र
भगवान राम की वापसी, समुद्र मंथन या राजा बलि के त्याग की कथाएँ सुनने के लिए एकत्र होना दिवाली की एक प्रिय परंपरा है।
आध्यात्मिक महत्व: इन कथाओं में कर्तव्य, भक्ति, विनम्रता और धर्मपरायणता की गहरी नैतिक सीख छिपी है। ये नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ती हैं।
आधुनिक अंदाज़: एक पारिवारिक कहानी-मंडली बनाएँ जिसमें अलग-अलग सदस्य रामायण के अलग-अलग प्रसंग सुनाएँ या कठिनाइयों पर विजय की अपनी निजी कहानियाँ साझा करें।
5. पारंपरिक मिठाइयाँ बनाना
लड्डू, बर्फ़ी और गुलाब जामुन जैसी दिवाली की मिठाइयाँ मिलकर बनाना पाक-कला के साथ-साथ एक आध्यात्मिक गतिविधि भी है।
आध्यात्मिक महत्व: घर की बनी मिठाइयाँ देवताओं को अर्पित करना और पड़ोसियों के साथ बाँटना उस मिठास का प्रतीक है जो हम सबके जीवन में लाना चाहते हैं। मिलकर खाना बनाना सहयोग और देने का आनंद सिखाता है।
पारिवारिक जुड़ाव: एक 'असेंबली लाइन' बनाएँ जिसमें परिवार के अलग-अलग सदस्य मिठाई बनाने के अलग-अलग चरण सँभालें — तैयारी से लेकर सजावट तक।
6. दान-पुण्य (दान)
कम भाग्यशाली लोगों को देना दिवाली उत्सव का अभिन्न अंग है।
आध्यात्मिक महत्व: दिवाली सिखाती है कि सच्ची समृद्धि बाँटने से आती है। ज़रूरतमंदों को कपड़े, भोजन या धन दान करने से धन शुद्ध होता है और आशीर्वाद मिलता है। इससे बच्चों में करुणा और सामाजिक दायित्व की भावना आती है।
पारिवारिक गतिविधि: मिलकर दान के लिए सामान इकट्ठा करें, धर्मार्थ संस्थाओं में जाएँ या वंचितों के लिए भोजन प्रायोजित करें। दूसरे बच्चों को दान देने के लिए खिलौने या कपड़े चुनने में बच्चों को शामिल करें।
आध्यात्मिक सीख देने वाले नए खेल
1. रामायण प्रश्नोत्तरी
रामायण और दिवाली के महत्व पर आधारित एक पारिवारिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित करें।
आध्यात्मिक मूल्य: इससे सीखना मज़ेदार और प्रतिस्पर्धी बनता है और साथ ही शास्त्रों व मूल्यों का ज्ञान पक्का होता है।
2. सद्गुण खोज
एक 'ट्रेज़र हंट' बनाएँ जिसके सुराग हिंदू मूल्यों और सद्गुणों पर आधारित हों। हर सुराग एक नैतिक सीख देता है, और ख़ज़ाना प्रसाद या कोई छोटी आध्यात्मिक पुस्तक हो सकता है।
आध्यात्मिक मूल्य: एक रोमांचक खेल का आनंद लेते हुए बच्चे ईमानदारी, साहस और भक्ति जैसे सद्गुणों के बारे में सीखते हैं।
3. ध्यान मंडली
दिवाली के दौरान पारिवारिक ध्यान सत्र शुरू करें — केवल पाँच मिनट से आरंभ करके धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।
आध्यात्मिक मूल्य: इससे बच्चे आंतरिक शांति का महत्व सीखते हैं और दिवाली के सच्चे अर्थ — चेतना के आंतरिक प्रकाश — से जुड़ते हैं।
4. मंत्र म्यूज़िकल चेयर्स
भक्ति संगीत के साथ म्यूज़िकल चेयर्स खेलें, और जो बाहर हो, उसे कोई मंत्र सुनाना हो या बताना हो कि वह किस बात के लिए आभारी है।
आध्यात्मिक मूल्य: मनोरंजन को भक्ति से जोड़ता है और कृतज्ञता का भाव विकसित करता है।
संध्या आरती और उत्सव
सामूहिक आरती
संयुक्त परिवार या पड़ोस को सामूहिक आरती के लिए एकत्र करें। एक स्वर में गाए गए भजन शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
आध्यात्मिक महत्व: सामूहिक उपासना भक्ति को बढ़ाती है और एकता का भाव जगाती है। यह याद दिलाती है कि हम सब एक ही ब्रह्मांडीय परिवार का हिस्सा हैं।
प्रदक्षिणा (परिक्रमा)
पूजा के बाद परिवार के सदस्य पूजा-स्थल या दीपों से सजे घर की प्रदक्षिणा करते हैं।
आध्यात्मिक महत्व: पवित्र स्थान के चारों ओर दक्षिणावर्त चलना इस बात का प्रतीक है कि हम ईश्वर को अपने जीवन के केंद्र में रखते हैं। यह ब्रह्मांड की गति और उसके साथ हमारे सामंजस्य को दर्शाता है।
पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिक रूप
वर्चुअल उत्सव
दूरी के कारण अलग रह रहे परिवारों के लिए वीडियो कॉल पर वर्चुअल दिवाली खेल और पूजा सत्र आयोजित करें।
आध्यात्मिकता बनाए रखना: स्क्रीन के माध्यम से भी, जब हृदय भक्ति में जुड़े हों, तो आध्यात्मिक सार अक्षुण्ण रहता है।
पर्यावरण-अनुकूल उत्सव
प्लास्टिक की सजावट की जगह मिट्टी के दीये और रंगोली के लिए प्राकृतिक रंग जैसे टिकाऊ उपाय अपनाएँ।
आध्यात्मिक सामंजस्य: प्रकृति का सम्मान करना हिंदू दर्शन के अनुरूप है, जो समस्त सृष्टि में ईश्वर को देखता है। इससे बच्चे पर्यावरण की देखभाल सीखते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स दिवस
दिवाली को ऐसा दिन बनाएँ जिसमें स्क्रीन-टाइम कम से कम और परिवार के साथ मेल-जोल अधिक से अधिक हो।
आध्यात्मिक लाभ: तकनीक से कुछ समय दूर रहना अपने अंतर्मन और प्रियजनों से फिर जुड़ने में मदद करता है, और यही इस पर्व की सच्ची भावना है।
बच्चों को गहरा अर्थ सिखाना
कथा-आधारित शिक्षा
कठपुतलियों या अभिनय के माध्यम से रामायण की कथाओं का मंचन करें, ताकि बच्चों को वे याद रहें।
कृतज्ञता डायरी
बच्चों को दिवाली की एक विशेष कृतज्ञता डायरी रखने के लिए प्रेरित करें, जिसमें वे अपने आशीर्वादों और सीखी गई बातों के बारे में लिखें।
सेवा कार्य
दिवाली के मौसम में बच्चों को सामुदायिक सेवा में शामिल करें और उन्हें सेवा (निःस्वार्थ सेवा) का भाव सिखाएँ।
यादगार पल संजोना
पारिवारिक परंपरा पुस्तिका
एक पारिवारिक एल्बम या डायरी बनाएँ जिसमें हर वर्ष की दिवाली परंपराएँ, खेले गए खेल और मिली आध्यात्मिक सीखें दर्ज हों।
व्यंजनों की विरासत
दिवाली की पारंपरिक मिठाइयों और उनके पीछे की कहानियों के साथ एक पारिवारिक व्यंजन-पुस्तिका तैयार करें।
आशीर्वाद मंडली
दिवाली के हर दिन का समापन एक आशीर्वाद मंडली से करें, जिसमें परिवार के सदस्य एक ऐसी बात साझा करें जिसके लिए वे आभारी हैं और एक-दूसरे को आशीर्वाद दें।
परम लक्ष्य: आंतरिक प्रकाश
ये सभी खेल और गतिविधियाँ आनंद और अपनापन लाती हैं, पर दिवाली उत्सव का परम उद्देश्य हमें भीतर के शाश्वत प्रकाश की याद दिलाना है। बाहर जलाया गया हर दीया हमें अपने हृदय में ज्ञान, करुणा और भक्ति का दीप जलाने की प्रेरणा दे।
जब परिवार मिलकर खेलते हैं, कला रचते हैं और पूजा करते हैं, तो वे केवल एक पर्व नहीं मना रहे होते — वे रिश्तों को मज़बूत कर रहे होते हैं, मूल्यों को आगे बढ़ा रहे होते हैं और आने वाली पीढ़ियों का मार्ग रोशन कर रहे होते हैं। तीन पत्ती के खेल में बाँटी गई हँसी, रंगोली बनाते हुए सीखा गया धैर्य और लक्ष्मी पूजा में व्यक्त की गई भक्ति — ये सब मिलकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक समृद्ध ताना-बाना बुनते हैं।
निष्कर्ष
दिवाली के खेल और गतिविधियाँ केवल मनोरंजन से कहीं बढ़कर हैं। ये आध्यात्मिक ज्ञान के वाहक, पीढ़ियों के बीच सेतु और स्वयं जीवन का उत्सव हैं। इन परंपराओं को उनके गहरे महत्व की समझ के साथ अपनाकर परिवार दिवाली को रोशनी के पर्व से ज्ञानोदय के पर्व में बदल सकते हैं।
इस दिवाली, जब आप अपने प्रियजनों के साथ पारंपरिक खेल खेलने और कालजयी गतिविधियों में शामिल होने के लिए एकत्र हों, तो याद रखें कि आप एक ऐसी पवित्र परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं जिसने हज़ारों वर्षों से हृदयों को प्रकाशित किया है। आपका उत्सव आनंद से, आपका घर प्रकाश से और आपका हृदय धर्म के शाश्वत ज्ञान से भरा रहे।
शुभ दीपावली! दिव्य प्रकाश समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर आपका मार्ग आलोकित करे।
2026 की संबंधित गाइड
- दिवाली 2026: तिथियाँ, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और 5 दिनों की गाइड
- 30 भारतीय शहरों में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026
- लक्ष्मी पूजा विधि 2026: चरण-दर-चरण
- धनतेरस 2026
- दिवाली 2026 का 5 दिवसीय कैलेंडर एक नज़र में
दिवाली 2026 की शुभकामनाएँ साझा करें
दिवाली वह पर्व है जब पूरा परिवार एक साथ बैठता है: रंगोली बनाते हुए, दीये सजाते हुए, कथाएँ सुनते हुए और खेलों में हँसते हुए। हर दीया हमें भीतर के प्रकाश की याद दिलाता है, जो अज्ञान और अहंकार के अंधकार को दूर करता है। जब दादा-दादी और बच्चे मिलकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करते हैं, तो घर सच्ची समृद्धि से भर जाता है। इस दिवाली, साथ बिताए पलों की यह शुभकामना अपने परिवार और प्रियजनों के साथ बाँटें।
दीप श्लोक: दीपक की प्रार्थना
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
Shubham karoti kalyanam arogyam dhana-sampada, shatru-buddhi-vinashaya deepa-jyotir namostu te.
"शुभं करोति कल्याणम्" प्रार्थना में हम दीप की उस ज्योति को नमन करते हैं जो शुभ और मंगल करती है, आरोग्य और समृद्धि देती है, और शत्रु-बुद्धि का नाश करती है।
दिवाली के लिए लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
Om Shreem Mahalakshmyai Namah.
"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का अर्थ है महालक्ष्मी को प्रणाम, जहाँ "श्रीं" लक्ष्मी जी का बीज अक्षर है।
साझा करने के लिए दिवाली 2026 संदेश
🪔 रंगोली के रंग, दीयों की रोशनी और अपनों की हँसी से आपका घर इस दिवाली खुशियों से भर जाए। पूरे परिवार को शुभ दीपावली! 🌸 WhatsApp पर भेजें
🙏 दादा-दादी, नाना-नानी और सभी बड़ों को प्रणाम। आपकी कहानियाँ और सीख ही हमारे घर का सबसे उजला दीया हैं। आप सदा स्वस्थ रहें। 🪔✨ WhatsApp पर भेजें
✨ प्रिय मित्र, इस दिवाली ताश की बाज़ी हो या साँप-सीढ़ी, जीत हमेशा हमारी दोस्ती की हो! तुम्हारा जीवन हँसी और रोशनी से भरा रहे। शुभ दीपावली! 🪔 WhatsApp पर भेजें
🌸 सभी सहकर्मियों और ग्राहकों को दिवाली की शुभकामनाएँ। हमारी टीम का साथ हर खेल की तरह धैर्य, समझदारी और भरोसे से आगे बढ़ता रहे। 🪔🙏 WhatsApp पर भेजें
🪔 माँ लक्ष्मी आपके घर की रंगोली पर पधारें और आपके परिवार को एकता, संतोष और शांति का आशीर्वाद दें। जय माँ लक्ष्मी! सुरक्षित और आनंदमय दिवाली मनाएँ। 🙏 WhatsApp पर भेजें
🙏 प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में जैसे घर-घर दीप जले, वैसे ही आपके परिवार में प्रेम और धर्म का उजाला सदा बना रहे। दिवाली 2026 मंगलमय हो! 🪔 WhatsApp पर भेजें
दिवाली की एक छोटी प्रार्थना
हे माँ लक्ष्मी, हे विघ्नहर्ता गणेश जी, आज पूरा परिवार साथ मिलकर आपके सामने दीप जला रहा है। हमारे घर में प्रेम, हँसी और आपसी सम्मान सदा बना रहे। बड़ों को अच्छा स्वास्थ्य और बच्चों को अच्छी बुद्धि दीजिए। हमें धैर्य, सच्चे परिश्रम और विनम्रता की राह पर चलना सिखाइए, और साथ बिताए हर पल के लिए हमें सदा कृतज्ञ बनाए रखिए।
इन शुभकामनाओं को अपने परिवार और मित्रों तक पहुँचाने के लिए इस पेज के शेयर बटन का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पारिवारिक खेलों और लक्ष्मी पूजा के लिए दिवाली 2026 कब है?
दिवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है — भारत के साथ-साथ USA, कनाडा, UK और ऑस्ट्रेलिया में भी। तीन पत्ती जैसे ताश के खेल परंपरागत रूप से लक्ष्मी पूजा की रात खेले जाते हैं।
दिवाली की रात लोग ताश क्यों खेलते हैं?
प्रचलित हिंदू मान्यता के अनुसार दिवाली की रात ताश खेलने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। जैसा कि आमतौर पर कहा जाता है, भगवान शिव और देवी पार्वती ने दिवाली की रात चौपड़ खेली थी, इसीलिए खेलों को इस पर्व से जोड़ा जाता है।
दिवाली के दौरान कौन-से पारंपरिक खेल खेले जाते हैं?
दिवाली के लोकप्रिय खेलों में तीन पत्ती, रमी, पचीसी (चौपड़), साँप-सीढ़ी (मोक्ष पटम) और हाउज़ी (तंबोला) शामिल हैं। परंपरा के अनुसार हर खेल किसी न किसी सीख से जुड़ा है, जैसे धैर्य, सोच-समझकर निर्णय लेना या बुराई पर अच्छाई की जीत।
बच्चे परिवार के साथ दिवाली की कौन-सी गतिविधियाँ कर सकते हैं?
बच्चे रंगोली बनाने, दीये रंगने और जलाने, लक्ष्मी पूजा में घंटी बजाने, मिठाइयाँ बनाने में हाथ बँटाने और दान के लिए खिलौने या कपड़े चुनने में मदद कर सकते हैं। रामायण प्रश्नोत्तरी, कहानी-मंडली या सद्गुण खोज भी पर्व का अर्थ सिखाती है।
दूर-दूर रहने वाले NRI परिवार दिवाली के खेल कैसे मना सकते हैं?
दूरी के कारण अलग रह रहे परिवार वीडियो कॉल पर वर्चुअल दिवाली खेल और पूजा सत्र आयोजित कर सकते हैं। रामायण प्रश्नोत्तरी, कृतज्ञता आशीर्वाद मंडली या साझा आरती जैसे सुझाव ऑनलाइन बहुत अच्छे से चलते हैं।




