तुला संक्रांति 2026 — तिथि (17 अक्टूबर), महत्व, कावेरी संक्रमण, पूजा विधि और प्रवासी गाइड
तुला संक्रांति 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर को है, जब सूर्य निरयन तुला राशि में प्रवेश करते हैं। यह नवरात्रि सप्तमी के दिन है; कार्तिक मास 10 नवंबर से शुरू होगा।

तुला संक्रांति 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर को है, जब सूर्य निरयन तुला राशि में प्रवेश करते हैं। यह नवरात्रि सप्तमी के दिन है; कार्तिक मास 10 नवंबर से शुरू होगा।
संक्षेप में: तुला संक्रांति 2026 शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को है, जब सूर्य निरयन राशिचक्र में कन्या से तुला राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन सौर तुला मास शुरू होता है — तमिलनाडु में ऐप्पसी और केरल में तुलाम। इस वर्ष यह कार्तिक मास की शुरुआत नहीं है: चंद्र पंचांग में कार्तिक मास दीपावली के बाद 10 नवंबर 2026 से शुरू होता है।
इस बार तुला संक्रांति शारदीय नवरात्रि के बीच (सप्तमी, कई क्षेत्रों में सरस्वती पूजा का दिन) पड़ रही है, इसलिए सूर्य पूजा और देवी पूजा एक ही दिन होगी।
तुला संक्रांति 2026 — मुख्य जानकारी
| विषय | विवरण |
|---|---|
| तिथि | शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 (भारत, अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया व खाड़ी देशों में समान) |
| सूर्य का गोचर | कन्या → तुला (निरयन) |
| आरंभ होने वाला सौर मास | तुला — ऐप्पसी (तमिलनाडु), तुलाम (केरल), ओड़िया व बंगाली सौर पंचांग में कार्तिक |
| पुण्य काल | संक्रांति क्षण के आसपास — अपने शहर के लिए द्रिक पंचांग देखें |
| इसी दिन | नवरात्रि सप्तमी · सरस्वती पूजा · कोलकाता दुर्गा पूजा महाषष्ठी |
| कार्तिक मास 2026 | 10 नवंबर – 8 दिसंबर (चंद्र मास, दीपावली के बाद) |
2026 में तुला संक्रांति से कार्तिक क्यों नहीं शुरू होता
संक्रांति सूर्य पर आधारित है, जबकि हिंदू मास चंद्रमा पर। कई वर्षों में सौर तुला मास और चंद्र कार्तिक मास लगभग साथ चलते हैं, इसलिए दोनों को जोड़ा जाता है। लेकिन 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास (17 मई – 15 जून) होने से सभी चंद्र मास लगभग तीन सप्ताह आगे खिसक गए हैं। इसलिए आश्विन (नवरात्रि व दशहरा) अक्टूबर के अंत तक चलता है और कार्तिक मास 10 नवंबर से शुरू होता है। कार्तिक मास 2026।
तुला संक्रांति कैसे मनाई जाती है
- कर्नाटक — कावेरी संक्रमण: कोडगु के तलकावेरी में कावेरी के उद्गम पर संक्रांति क्षण में तीर्थोद्भव होता है; कोडव परिवार कावेरी अम्मा की पूजा करते हैं।
- तमिलनाडु — ऐप्पसी आरंभ: पूरे मास कावेरी में तुला स्नान, विशेषकर मयिलादुतुरै में।
- ओडिशा — गर्भणा संक्रांति: किसान धान की अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं।
- केरल — तुलाम: तुलाम मास और उत्तर-पूर्वी (तुलावर्षम) वर्षा की शुरुआत।
- सर्वत्र: सूर्योदय पर सूर्य पूजा, पुण्य काल में दान और पितरों का स्मरण।
घर पर पूजा विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें; जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएँ।
- ताँबे के लोटे से जल, लाल फूल, कुमकुम व अक्षत के साथ उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें या "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" का 108 बार जप करें।
- नवरात्रि सप्तमी होने से सूर्य पूजा के बाद देवी पूजा और जहाँ परंपरा हो वहाँ सरस्वती पूजा करें।
- पुण्य काल में अन्न, वस्त्र, तिल या गुड़ का दान करें।
प्रवासियों के लिए
- अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों में भी तिथि शनिवार 17 अक्टूबर है — अधिकांश परिवारों के लिए सप्ताहांत।
- सूर्योदय पर बाहर न जा सकें तो पूर्व दिशा की खिड़की या बालकनी से अर्घ्य दें।
- उस शाम विदेशों के कई मंदिरों में नवरात्रि कार्यक्रम होते हैं — दर्शन के साथ संक्रांति दान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुला संक्रांति 2026 कब है?
तुला संक्रांति शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को है।
क्या 2026 में कार्तिक मास तुला संक्रांति से शुरू होता है?
नहीं। अधिक मास के कारण इस वर्ष कार्तिक मास 10 नवंबर 2026 से 8 दिसंबर तक है।
2026 में तुला संक्रांति पर कौन से त्योहार हैं?
इस दिन नवरात्रि सप्तमी, सरस्वती पूजा और तलकावेरी में कावेरी संक्रमण (तीर्थोद्भव) है। दशहरा तीन दिन बाद, 20 अक्टूबर को है।
संबंधित गाइड
तिथियाँ द्रिक पंचांग के अनुसार। अंतिम जाँच: 4 अक्टूबर 2026।




