नरक चतुर्दशी — छोटी दिवाली — दीपोत्सव का दूसरा दिन है, जो दैत्य नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय और भोर से पहले अभ्यंग स्नान (विधिपूर्वक तेल स्नान) की परंपरा का प्रतीक है। हिंदूटोन (HinduTone) की यह मार्गदर्शिका नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली 2026 की कथा और विधि समझाती है।

नरक चतुर्दशी 2026 शनिवार, 7 नवंबर को है। भक्त प्रातःकाल अभ्यंग स्नान करते हैं और दिवाली के स्वागत में दीप जलाते हैं।

नरकासुर की कथा

दैत्य नरकासुर ने स्वर्गलोक पर अत्याचार किया और हज़ारों लोगों को बंदी बना लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर उसे पराजित कर उसका वध किया और बंदियों को मुक्त कराया। पश्चाताप से भरे नरकासुर ने प्रार्थना की कि उसकी मृत्यु को शोक के रूप में नहीं, बल्कि प्रकाश और उत्सव के दिन के रूप में याद किया जाए — इसीलिए छोटी दिवाली पर दीप जलाए जाते हैं और आनंद मनाया जाता है।

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अभ्यंग स्नान

भोर से पहले, सूर्योदय से पूर्व सुगंधित तेल और उबटन के साथ किया जाने वाला विधिपूर्वक तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) दक्षिण और पश्चिम भारत में विशेष महत्व रखता है। यह अशुद्धियों को धो डालने का प्रतीक है और माना जाता है कि इस दिन यह स्नान पवित्र गंगा में स्नान करने जितना ही पुण्यदायी है।

कैसे मनाया जाता है

  • अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) के लिए भोर से पहले उठें
  • दिवाली की तैयारी में शाम को कुछ दीये जलाएँ
  • दक्षिण भारत में यही दीपावली उत्सव का मुख्य दिन है
  • जहाँ अनुमति हो, वहाँ थोड़े पटाखे/फुलझड़ियाँ जलाएँ और त्योहार की मिठाइयों का आनंद लें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नरक चतुर्दशी 2026 कब है?

शनिवार, 7 नवंबर 2026 — दिवाली के पाँच दिनों में से दूसरा दिन (छोटी दिवाली)।

अभ्यंग स्नान क्या है?

नरक चतुर्दशी पर भोर से पहले किया जाने वाला विधिपूर्वक तेल स्नान, जिसे अत्यंत पवित्र करने वाला माना जाता है।

नरक चतुर्दशी किस बात का उत्सव है?

दैत्य नरकासुर पर भगवान श्रीकृष्ण की विजय और अंधकार पर प्रकाश की जीत का।

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