लाभ पंचमी 2026: तिथि, सौभाग्य पंचमी, जैन ज्ञान पंचमी और पूजा
लाभ पंचमी 2026, जिसे सौभाग्य पंचमी भी कहते हैं, शनिवार, 14 नवंबर 2026 को है। कई गुजराती व्यापारियों के लिए यह नए वर्ष का पहला कामकाजी दिन होता है। जैन समाज इसी दिन ज्ञान की आराधना करते हुए ज्ञान पंचमी मनाता है। यहाँ तिथि, सरल पूजा विधि और विदेश में बसे परिवारों के लिए सुझाव दिए गए हैं।

लाभ पंचमी 2026, जिसे सौभाग्य पंचमी भी कहते हैं, शनिवार, 14 नवंबर 2026 को है। कई गुजराती व्यापारियों के लिए यह नए वर्ष का पहला कामकाजी दिन होता है।
संक्षिप्त उत्तर: लाभ पंचमी 2026, जिसे सौभाग्य पंचमी भी कहते हैं, भारत में शनिवार, 14 नवंबर 2026 को है। कई गुजराती व्यापारियों के लिए यह नए वर्ष का पहला कामकाजी दिन होता है, जब दिवाली के बाद लक्ष्मी और गणेश पूजा के साथ दुकानें फिर खुलती हैं। जैन समाज इसी दिन ज्ञान पंचमी मनाता है, जो ज्ञान के सम्मान का दिन है।
यह लेख hindutone.com के अपने मूल पते पर फिर से उपलब्ध कराया गया है। नीचे दी गई तिथियाँ और समय नई दिल्ली के द्रिक पंचांग से हैं। भारत के बाहर तिथि एक दिन अलग हो सकती है, इसलिए अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें।
लाभ पंचमी 2026 की तिथि और पंचांग
| विवरण (नई दिल्ली, IST) | 2026 |
|---|---|
| लाभ पंचमी | शनिवार, 14 नवंबर 2026 |
| तिथि | कार्तिक शुक्ल पंचमी, रात 11:23 PM तक |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:43 AM / 05:28 PM |
| एक दिन पहले | लाभ चतुर्थी, शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 |
स्रोत: द्रिक पंचांग, नई दिल्ली। हम मुहूर्त का समय नहीं देते। कारोबार शुरू करने या पूजा के मुहूर्त के लिए अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें।
गुजराती त्योहारों के मौसम में लाभ पंचमी का स्थान
गुजरात में लाभ पंचमी दिवाली और नए वर्ष के उत्सवों का समापन करती है। नई दिल्ली के द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 का क्रम इस प्रकार है:
| तिथि (भारत) | पर्व |
|---|---|
| रविवार, 8 नवंबर 2026 | दिवाली, चोपड़ा पूजा, शारदा पूजा |
| मंगलवार, 10 नवंबर 2026 | गुजराती नववर्ष (बेस्तु वरस) |
| बुधवार, 11 नवंबर 2026 | भाई दूज (भाई बीज) |
| शनिवार, 14 नवंबर 2026 | लाभ पंचमी |
दिवाली पर चोपड़ा पूजा में नए बही-खातों की पूजा होती है। बेस्तु वरस से नया वर्ष शुरू होता है। फिर लाभ पंचमी पर व्यापारी परिवार नए वर्ष में विधिवत कारोबार शुरू करते हैं। पूरे सप्ताह की जानकारी के लिए हमारी गुजराती नववर्ष 2026 गाइड देखें।
व्यापारियों के लिए लाभ पंचमी का महत्व
'लाभ' का अर्थ है मुनाफ़ा या प्राप्ति, और 'सौभाग्य' का अर्थ है अच्छा भाग्य। गुजरात में दिवाली के बाद कई दुकानें, दफ़्तर और बाज़ार कुछ दिनों तक बंद रहते हैं, ताकि परिवार त्योहार मना सकें और रिश्तेदारों से मिल सकें। लाभ पंचमी वह दिन है जब वे फिर खुलते हैं। कई व्यापारी नए बही-खातों में 'शुभ' और 'लाभ' लिखते हैं, स्वस्तिक बनाते हैं और छोटी-सी पूजा के बाद वर्ष की पहली प्रविष्टि करते हैं।
इसका भाव केवल धन तक सीमित नहीं है। व्यापारी प्रार्थना करते हैं कि वर्ष की शुरुआत ईमानदारी से हो, ग्राहकों की अच्छी सेवा हो और कमाई का एक भाग ज़रूरतमंदों के साथ बाँटा जाए। कई लोग उन मित्रों और रिश्तेदारों से भी मिलने जाते हैं, जिनसे वे त्योहार के सप्ताह में पहले नहीं मिल पाए थे।
लाभ पंचमी पर लक्ष्मी और गणेश पूजा
हर परिवार की परंपरा अलग होती है। घर या कार्यस्थल पर एक सरल पूजा:
- दुकान, दफ़्तर या घर के पूजा स्थान को साफ़ करें। एक साफ़ कपड़े पर गणेश और लक्ष्मी के चित्र रखें।
- विघ्नहर्ता गणेश से शुरुआत करें और उन्हें फूल, दूर्वा घास और मिठाई अर्पित करें।
- लक्ष्मी को फूल, कुमकुम, अक्षत (चावल), दीपक, धूप और मिठाई अर्पित करें।
- काम में आने वाले बही-खातों, तिजोरी, चाबियों या लैपटॉप पर कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएँ।
- यदि आपके परिवार में यह परंपरा है, तो नए खातों में 'शुभ' और 'लाभ' लिखें और स्वस्तिक बनाएँ।
- वर्ष भर कुशलता, स्थिर काम और ईमानदार कमाई के लिए प्रार्थना करें। कई परिवार 'ॐ श्री गणेशाय नमः' और 'ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः' का जाप करते हैं।
- आरती के साथ पूजा पूरी करें, प्रसाद बाँटें और वर्ष की पहली व्यापारिक प्रविष्टि या बिक्री करें।
कई लोग इस दिन दान भी करते हैं, जैसे भोजन, कपड़े, या किसी मंदिर अथवा भरोसेमंद संस्था को दान।
ज्ञान पंचमी: जैन पर्व
जैन समाज के लिए कार्तिक शुक्ल पंचमी ज्ञान पंचमी है, जिसे ज्ञान पंचमी (Jnana Panchami) भी कहा जाता है। 'ज्ञान' का अर्थ है जानकारी और बोध। जैन धर्म में सम्यक ज्ञान को मार्ग के मूल मूल्यों में से एक माना जाता है। इस दिन कई जैन:
- देरासर (जैन मंदिर) जाते हैं और प्रार्थना में भाग लेते हैं।
- पवित्र ग्रंथों की सफ़ाई करते हैं, उन्हें सजाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। कई मंदिरों और घरों में श्रद्धा के लिए शास्त्रों के दर्शन कराए जाते हैं।
- पुस्तकों, कलमों और ज्ञान के अन्य साधनों का सम्मान करते हैं और उनके साथ लापरवाही नहीं बरतते।
- अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं या सादा भोजन करते हैं।
- पढ़ते हैं, अध्ययन करते हैं या प्रवचन सुनते हैं, और पुस्तकालयों व विद्यालयों की सहायता करते हैं।
जैन संप्रदायों और परिवारों में परंपराएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए अपने समाज के मार्गदर्शन का पालन करें।
NRI परिवारों के लिए लाभ पंचमी
ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, पूर्वी अफ़्रीका और खाड़ी देशों में बसे गुजराती और जैन परिवार यह दिन कई तरह से मनाते हैं। कुछ सुझाव:
- स्थानीय तिथि देखें: अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें। भारत के समय को बदलकर उपयोग न करें।
- काम से पहले छोटी पूजा: गणेश और लक्ष्मी के सामने दीपक जलाएँ और वर्ष भर के काम के लिए प्रार्थना करें। व्यापारी दुकान की चाबियों या गल्ले पर तिलक लगा सकते हैं।
- नई डायरी शुरू करें: नौकरीपेशा लोग नई वर्क डायरी या प्लानर शुरू कर सकते हैं, जिसके पहले पन्ने पर 'शुभ लाभ' लिखा हो।
- जैन परिवार: अपने स्थानीय देरासर जाएँ और ज्ञान पंचमी कार्यक्रमों के लिए उसकी अपनी सूचनाएँ देखें।
- बच्चों को सिखाएँ: उन्हें समझाएँ कि ईमानदारी से किया गया काम और ज्ञान का सम्मान ही इस दिन का असली अर्थ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लाभ पंचमी 2026 कब है?
नई दिल्ली के द्रिक पंचांग के अनुसार भारत में लाभ पंचमी 2026 शनिवार, 14 नवंबर 2026 को है। यह कार्तिक शुक्ल पंचमी, यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के पाँचवें दिन पड़ती है।
लाभ पंचमी का क्या अर्थ है?
'लाभ' का अर्थ है मुनाफ़ा या फ़ायदा, और 'पंचमी' चंद्र मास की पाँचवीं तिथि है। इस दिन को सौभाग्य पंचमी भी कहते हैं, यानी सौभाग्य की पंचमी। लोग समृद्धि, कुशलता और काम में सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं।
गुजराती व्यापारी लाभ पंचमी पर अपनी दुकानें क्यों खोलते हैं?
कई गुजराती व्यापारी परिवार दिवाली से लेकर नए वर्ष के शुरुआती दिनों तक अपनी दुकानें बंद रखते हैं। वे लाभ पंचमी पर पूजा करके दुकानें फिर खोलते हैं और इसे वर्ष का शुभ पहला कामकाजी दिन मानते हैं।
जैनों के लिए ज्ञान पंचमी क्या है?
जैन समाज कार्तिक शुक्ल पंचमी को ज्ञान पंचमी के रूप में मनाता है, जो ज्ञान के सम्मान का दिन है। कई जैन पवित्र ग्रंथों और ज्ञान के अन्य साधनों की पूजा करते हैं, और कुछ लोग उपवास भी रखते हैं।
लाभ पंचमी 2026 का मुहूर्त क्या है?
हम यहाँ मुहूर्त का समय नहीं दे रहे हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में पंचमी तिथि 14 नवंबर को रात 11:23 PM IST तक रहेगी। मुहूर्त के लिए अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें।
क्या भारत के बाहर भी तिथि यही रहती है?
हमेशा नहीं। उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन, पूर्वी अफ़्रीका या ऑस्ट्रेलिया में तिथि भारत से एक दिन अलग हो सकती है। अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें।
संपादकीय टिप्पणी
संपादकीय टिप्पणी (6 अक्टूबर 2026): पिछला संस्करण खो जाने के बाद यह लेख अपने मूल पते पर फिर से उपलब्ध कराया गया है। तिथि, तिथि समाप्ति का समय और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय नई दिल्ली के द्रिक पंचांग से हैं और केवल IST में दिए गए हैं। हमने मुहूर्त का समय या कार्यक्रम नहीं दिए हैं। हिंदू और जैन परिवारों व समुदायों में पूजा की परंपराएँ अलग-अलग होती हैं। भारत के बाहर के पाठक अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें।


