गुरुवायूर एकादशी 2026: तिथि, महत्व, चेम्बई संगीतोत्सवम और मंदिर की परंपराएँ
द्रिक पंचांग के अनुसार गुरुवायूर एकादशी 2026 शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है। यह मलयालम मास वृश्चिकम की शुक्ल एकादशी है और केरल के गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव-दिवस है। जानिए इसका अर्थ, इससे पहले होने वाला चेम्बई संगीत उत्सव, मंदिर की परंपराएँ और घर पर या विदेश में व्रत कैसे रखें।

द्रिक पंचांग के अनुसार गुरुवायूर एकादशी 2026 शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है। यह मलयालम मास वृश्चिकम की शुक्ल एकादशी है और केरल के गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव-दिवस है।
संक्षिप्त उत्तर: गुरुवायूर एकादशी 2026 शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है, द्रिक पंचांग के अनुसार। यह मलयालम मास वृश्चिकम की शुक्ल पक्ष एकादशी है और केरल के त्रिशूर (Thrissur) ज़िले में स्थित गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव-दिवस है। भक्त व्रत रखते हैं, गुरुवायूरप्पन के दर्शन करते हैं और इससे पहले होने वाले चेम्बई संगीतोत्सवम का आनंद लेते हैं। मंदिर के कार्यक्रमों की सटीक तिथियाँ गुरुवायूर देवस्वम (Guruvayur Devaswom) द्वारा घोषित की जाती हैं।
यह मार्गदर्शिका अपने मूल hindutone.com पते पर पुनः उपलब्ध कराई गई है। नीचे दी गई तिथियाँ द्रिक पंचांग से हैं। भारत के बाहर, व्रत रखने से पहले अपने शहर के लिए द्रिक पंचांग देखें।
गुरुवायूर एकादशी 2026 तिथि
| पर्व | 2026 तिथि |
|---|---|
| देवउत्थान एकादशी / कंस वध / भीष्म पंचक आरंभ | शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 |
| गुरुवायूर एकादशी / वैष्णव देवउत्थान एकादशी / तुलसी विवाह | शनिवार, 21 नवंबर 2026 |
| रवि प्रदोष व्रत | रविवार, 22 नवंबर 2026 |
| कार्तिक पूर्णिमा / कार्तिगई दीपम | मंगलवार, 24 नवंबर 2026 |
स्रोत: द्रिक पंचांग। हम यहाँ तिथि के समय या पारण (व्रत खोलने) का समय नहीं दे रहे हैं। एकादशी, चेम्बई उत्सव, शोभायात्राओं और विशेष पूजाओं का मंदिर का अपना कार्यक्रम गुरुवायूर देवस्वम द्वारा तय और घोषित किया जाता है। वर्तमान समय के लिए देवस्वम की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
गुरुवायूर एकादशी का महत्व
गुरुवायूर को अक्सर दक्षिण की द्वारका कहा जाता है। यहाँ के प्रमुख देवता गुरुवायूरप्पन बाल कृष्ण के रूप में भगवान विष्णु हैं, जो चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए हैं। प्रचलित कथा के अनुसार यह विग्रह कभी द्वारका में पूजा जाता था। जब द्वारका समुद्र में डूब गई, तब गुरु (देवताओं के गुरु बृहस्पति) और वायु (पवन देव) ने इसे बचाया और भगवान शिव के आशीर्वाद से इस स्थान पर स्थापित किया। नगर का नाम उन्हीं से पड़ा: गुरु + वायु + 'ऊर' (स्थान)।
हर एकादशी भगवान विष्णु को प्रिय है, लेकिन गुरुवायूर में वृश्चिकम मास की एकादशी सबसे महत्वपूर्ण है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन व्रत रखने और गुरुवायूरप्पन के दर्शन करने से महान आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। 2026 में द्रिक पंचांग के अनुसार यह वैष्णव देवउत्थान एकादशी के साथ भी पड़ रही है, जब माना जाता है कि भगवान विष्णु अपनी चार मास की योगनिद्रा से जागते हैं, इसलिए अनेक परिवारों के लिए यह दिन दोगुना महत्वपूर्ण है।
चेम्बई संगीतोत्सवम
इस मौसम का सबसे प्रिय हिस्सा चेम्बई संगीतोत्सवम है, जो एकादशी से पहले के दिनों में गुरुवायूर में होने वाला कर्नाटक संगीत उत्सव है। यह प्रसिद्ध गायक चेम्बई वैद्यनाथ भागवतर को समर्पित है, जो जीवनभर गुरुवायूरप्पन के भक्त रहे और कई वर्षों तक मंदिर में गाते रहे।
यह उत्सव अपनी खुली भावना के लिए जाना जाता है। संगीत में पहला कदम रखने वाले बच्चों से लेकर वरिष्ठ कलाकारों तक बड़ी संख्या में संगीतकार एक के बाद एक भगवान के सामने गीत अर्पित करते हैं। अनेक कर्नाटक संगीतकारों के लिए चेम्बई उत्सव में गाना भक्ति का एक अनमोल अवसर है। उत्सव की तिथियाँ और कार्यक्रम हर वर्ष गुरुवायूर देवस्वम द्वारा घोषित किए जाते हैं।
एकादशी पर मंदिर की परंपराएँ
गुरुवायूर की परंपराएँ बहुत पुरानी हैं और देवस्वम हर वर्ष विवरण घोषित करता है। सामान्य रूप से एकादशी का मौसम इनसे जुड़ा है:
- एकादशी विळक्कु: एकादशी से पहले के दिनों में मंदिर के दीपक अर्पण के रूप में विशेष ढंग से जलाए जाते हैं, जिन्हें अक्सर भक्त और समूह प्रायोजित करते हैं, और पूरा वातावरण जगमगा उठता है।
- उदयास्तमन पूजा: सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलने वाली विस्तृत पूजाओं की श्रृंखला, जो एकादशी पालन के अंग के रूप में गुरुवायूरप्पन को अर्पित की जाती है।
- हाथियों की शोभायात्रा: गुरुवायूर अपने मंदिर के हाथियों के लिए प्रसिद्ध है, और मंदिर उत्सवों में सजे-धजे हाथी शोभायात्राओं में भाग लेते हैं। प्रसिद्ध हाथी गुरुवायूर केशवन को भक्त आज भी बड़े स्नेह से याद करते हैं।
- भारी भीड़: एकादशी पर बहुत बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं, और दर्शन की कतारें लंबी हो सकती हैं।
गुरुवायूर में मंदिर के नियम कड़े हैं, जिनमें पारंपरिक वेशभूषा का नियम भी शामिल है। देवस्वम के वर्तमान नियमों का पालन करें और यात्रा से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट देखें।
गुरुवायूर एकादशी व्रत कैसे रखें
व्रत के नियम हर परिवार में अलग होते हैं। एक व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली विधि:
- दशमी के दिन, यानी एक दिन पहले, एक बार सादा और हल्का भोजन करें; यदि आपके परिवार की परंपरा हो तो चावल के बिना।
- एकादशी के दिन चावल और अनाज से परहेज़ करें। कुछ लोग पूर्ण उपवास रखते हैं, तो कुछ फल, दूध या अनुमत खाद्य पदार्थों का एक सादा भोजन लेते हैं।
- सुबह जल्दी स्नान करें, गुरुवायूरप्पन या श्री कृष्ण के सामने दीपक जलाएँ, और तुलसी दल, पुष्प तथा सादा नैवेद्य अर्पित करें।
- 'ॐ नमो नारायणाय' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें, या नारायणीयम अथवा भगवद्गीता का पाठ करें।
- द्वादशी के दिन अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए पारण समय के भीतर व्रत खोलें।
बुज़ुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और कोई भी बीमार व्यक्ति केवल उसी तरह व्रत रखें जो उनके लिए सुरक्षित हो।
NRI परिवारों के लिए गुरुवायूर एकादशी
- अपनी स्थानीय तिथि देखें: अपने व्रत का दिन और पारण तय करने के लिए अपने शहर का द्रिक पंचांग देखें। भारत के समय को परिवर्तित न करें।
- विदेश के मंदिर: भारत के बाहर कुछ गुरुवायूरप्पन और कृष्ण मंदिर एकादशी पर विशेष पूजा या संगीत अर्पण आयोजित करते हैं। अपने मंदिर की वेबसाइट देखें।
- घर पर संगीत: चेम्बई उत्सव की भावना में, परिवार की ओर से अर्पण के रूप में श्री कृष्ण पर कोई कर्नाटक कृति गाएँ या बजाएँ।
- विदेश से अर्पण: यदि आप गुरुवायूर में वऴिपाडु (अर्पण) बुक करना चाहते हैं, तो केवल देवस्वम के आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरुवायूर एकादशी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार गुरुवायूर एकादशी 2026 शनिवार, 21 नवंबर 2026 को है। द्रिक पंचांग इसी तिथि पर वैष्णव देवउत्थान एकादशी और तुलसी विवाह भी दर्शाता है।
गुरुवायूर एकादशी विशेष क्यों है?
यह मलयालम मास वृश्चिकम की शुक्ल पक्ष एकादशी है और केरल के गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर में सबसे महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखने और गुरुवायूरप्पन के दर्शन करने को विशेष पुण्यदायी मानते हैं।
चेम्बई संगीतोत्सवम क्या है?
यह एकादशी से पहले के दिनों में गुरुवायूर में होने वाला कर्नाटक संगीत उत्सव है, जो महान गायक चेम्बई वैद्यनाथ भागवतर की स्मृति में आयोजित होता है, जो जीवनभर गुरुवायूरप्पन के भक्त रहे। नौसिखियों से लेकर दिग्गजों तक अनेक संगीतकार अर्पण के रूप में गाते हैं। इसकी तिथियाँ गुरुवायूर देवस्वम द्वारा घोषित की जाती हैं।
उदयास्तमन पूजा क्या है?
उदयास्तमन पूजा का अर्थ है सूर्योदय (उदय) से सूर्यास्त (अस्तमन) तक की आराधना। यह गुरुवायूरप्पन की पूरे दिन चलने वाली विस्तृत पूजाओं की श्रृंखला है और गुरुवायूर में एकादशी से जुड़ी है।
क्या गुरुवायूर एकादशी हमेशा देवउत्थान एकादशी के दिन ही होती है?
हमेशा नहीं। गुरुवायूर एकादशी मलयालम सौर मास वृश्चिकम के अनुसार होती है, जबकि देवउत्थान एकादशी चांद्र मास कार्तिक के अनुसार। 2026 में द्रिक पंचांग दोनों को एक ही तिथि, शनिवार 21 नवंबर, पर दर्शाता है।
क्या भारत के बाहर भी तिथि यही है?
मंदिर का उत्सव गुरुवायूर में निश्चित है। विदेश में अपने एकादशी व्रत के लिए तिथि किसी अलग दिन पड़ सकती है, इसलिए अपने शहर के लिए द्रिक पंचांग देखें।
संपादक की टिप्पणी
संपादक की टिप्पणी (6 अक्टूबर 2026): पिछला संस्करण खो जाने के बाद यह मार्गदर्शिका अपने मूल पते पर पुनः उपलब्ध कराई गई है। पंचांग तिथियाँ द्रिक पंचांग से हैं। चेम्बई संगीतोत्सवम, एकादशी पूजाओं और शोभायात्राओं की तिथियाँ व समय गुरुवायूर देवस्वम द्वारा घोषित किए जाते हैं, इसलिए हमने कोई समय नहीं दिया है। मंदिर की कथा प्रचलित रूप में प्रस्तुत की गई है। भारत के बाहर के पाठक अपने शहर के लिए द्रिक पंचांग देखें।


