सिंगापुर में दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, धनतेरस का समय, तेल-स्नान की सुबह और 5 दिनों की मार्गदर्शिका
सिंगापुर में दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। यहाँ लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (7:19 PM – 9:13 PM), शुक्रवार 6 नवंबर का धनतेरस पूजा समय, सिंगापुर का 5 दिनों का कैलेंडर, तमिल परिवारों का भोर से पहले का तेल-स्नान और उत्तर भारतीय लक्ष्मी पूजा की परंपराएँ, घर पर पूजा की भक्तिपूर्ण विधि, तथा सार्वजनिक अवकाश और लिटिल इंडिया से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई है।

सिंगापुर में दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। यहाँ लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (7:19 PM – 9:13 PM), शुक्रवार 6 नवंबर का धनतेरस पूजा समय, सिंगापुर का 5 दिनों का कैलेंडर, तमिल परिवारों का भोर से पहले का तेल-स्नान और उत्तर भारतीय लक्ष्मी पूजा की परंपराएँ, घर पर पूजा की भक्तिपूर्ण विधि, तथा सार्वजनिक अवकाश और लिटिल इंडिया से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई है।
संक्षिप्त उत्तर: सिंगापुर में दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। तमिल परिवार उस सुबह भोर से पहले तेल-स्नान से शुरुआत करते हैं, और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 7:19 PM – 9:13 PM SGT है उसी शाम (द्रिक पंचांग)। धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है (पूजा मुहूर्त 7:28 PM – 9:13 PM)। गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है, ठीक भारत की तरह।
सिंगापुर (Singapore) भारत के बाहर उन गिने-चुने स्थानों में से है जहाँ दीपावली राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश और पूरे शहर का उत्सव है, और लिटिल इंडिया (Little India) हफ़्तों पहले से रोशनी से जगमगाने लगता है। यह मार्गदर्शिका 2026 के लिए एक हिंदू परिवार की ज़रूरत की हर बात एक जगह लाती है: सिंगापुर के लिए लक्ष्मी पूजा और धनतेरस का सटीक समय, पाँच दिनों का कैलेंडर, तमिल दीपावली की सुबह और उत्तर भारतीय लक्ष्मी पूजा की शाम, तथा आपके घर के लिए भक्तिपूर्ण चरण-दर-चरण पूजा। ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों में दिवाली के लिए भी हमारी दिवाली 2026 ऑस्ट्रेलिया, UAE और सिंगापुर मार्गदर्शिका देखें।
सिंगापुर में दीपावली 2026 की तिथियाँ: पाँचों दिन
| दिन | पर्व | सिंगापुर में तिथि | भारत में तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | धनतेरस (धनत्रयोदशी) | शुक्र, 6 नवंबर | शुक्र, 6 नवंबर |
| 2 | नरक चतुर्दशी — तमिल दीपावली, भोर से पहले तेल-स्नान | रवि, 8 नवंबर, सुबह | रवि, 8 नवंबर, सुबह |
| 3 | दीपावली — लक्ष्मी पूजा | रवि, 8 नवंबर, शाम | रवि, 8 नवंबर, शाम |
| — | कोई पर्व नहीं (सूर्योदय पर अमावस्या जारी) | सोम, 9 नवंबर | सोम, 9 नवंबर |
| 4 | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | मंगल, 10 नवंबर | मंगल, 10 नवंबर |
| 5 | भाई दूज (भैया दूज) | बुध, 11 नवंबर | बुध, 11 नवंबर |
ये सिंगापुर के लिए द्रिक पंचांग की तिथियाँ हैं और ये भारत से पूरी तरह मेल खाती हैं। इस वर्ष दीपावली की दो महान धाराएँ एक ही दिन मिल रही हैं: भोर में नरक चतुर्दशी का दक्षिण भारतीय उत्सव और संध्या में उत्तर भारतीय लक्ष्मी पूजा, दोनों रविवार, 8 नवंबर को हैं। USA, कनाडा, UK और UAE में रहने वाले मित्र गोवर्धन पूजा और भाई दूज एक दिन पहले (9 और 10 नवंबर) मनाएँगे — दोनों कैलेंडर अपने-अपने स्थान के लिए सही हैं।
सिंगापुर में लक्ष्मी पूजा और धनतेरस मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा अमावस्या की संध्या को प्रदोष काल में की जाती है — सूर्यास्त के बाद रात्रि का पहला भाग — और आदर्श रूप से तब, जब वृषभ लग्न, जो एक स्थिर राशि है, उदित हो रहा हो, ताकि लक्ष्मी जी की कृपा घर में स्थिर बनी रहे। मुहूर्त इन दोनों का मेल है, जिसकी गणना निरयण राशिचक्र से होती है: यही पद्धति द्रिक पंचांग अपनाता है, और नीचे दिए गए सिंगापुर के समय द्रिक पंचांग द्वारा प्रकाशित मान हैं।
| अवसर | तिथि | मुहूर्त (SGT) | प्रदोष काल | सूर्यास्त | स्रोत |
|---|---|---|---|---|---|
| लक्ष्मी पूजा (दीपावली) | रवि, 8 नवंबर | 7:19 PM – 9:13 PM | 6:50 PM – 9:13 PM | 6:50 PM | द्रिक पंचांग |
| धनतेरस पूजा | शुक्र, 6 नवंबर | 7:28 PM – 9:13 PM | 6:50 PM – 9:13 PM | 6:50 PM | द्रिक पंचांग |
सिंगापुर के समय पूरे द्वीप पर लागू होते हैं — जुरोंग (Jurong) से टैम्पिनीज़ (Tampines) और वुडलैंड्स (Woodlands) से सेंटोसा (Sentosa) तक अंतर एक मिनट से भी काफ़ी कम है। मुहूर्त लगभग दो घंटे का है और 9:13 PM पर प्रदोष काल के साथ समाप्त होता है, इसलिए संकल्प और गणेश पूजा 7:19 PM से कुछ मिनट पहले शुरू करें। जोहोर बाहरू (Johor Bahru) के परिवार इन्हीं समयों को निकट मार्गदर्शन के रूप में ले सकते हैं, परंतु उन्हें किसी मलेशियाई पंचांग से जाँच कर लेनी चाहिए।
भारत के मुहूर्त को कभी भी सिंगापुर समय में न बदलें
भारत का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 5:54 PM – 7:50 PM IST (नई दिल्ली, द्रिक पंचांग) है। इसमें सिंगापुर के ढाई घंटे जोड़ने पर 8:24 PM – 10:20 PM बनता है — यानी सिंगापुर का मुहूर्त शुरू होने के एक घंटे से भी अधिक बाद, और स्थानीय प्रदोष काल की समाप्ति के एक घंटे से भी अधिक बाद तक। मुहूर्त आपके अपने सूर्यास्त और आपके अपने क्षितिज पर उदित लग्न से जुड़ा होता है, इसलिए इसकी गणना सिंगापुर के लिए ही होनी चाहिए। 7:19 PM – 9:13 PM, या अपने मंदिर द्वारा घोषित समय का पालन करें — भारत के समय को बदलकर नहीं।
तमिल दीपावली: रविवार, 8 नवंबर की सुबह
सिंगापुर के अधिकांश हिंदुओं के लिए — जिनमें से बहुसंख्यक अपनी जड़ें तमिलनाडु से जोड़ते हैं — दीपावली नरक चतुर्दशी की सुबह है, जो भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय और अंधकार पर प्रकाश की जीत का उत्सव है। रीति-रिवाज़ परिवार के अनुसार अलग होते हैं, पर सामान्यतः इनमें शामिल हैं:
- गंगा स्नानम्, तेल-स्नान: सूर्योदय से पहले घर के बड़े हर सदस्य के सिर पर गुनगुना तिल का तेल लगाते हैं, जिसके बाद शिकाकाई या हर्बल चूर्ण से स्नान किया जाता है। परंपरा है कि इस सुबह हर स्नान का जल गंगा जितना पवित्र होता है — इसीलिए अभिवादन होता है "गंगा स्नानम् आच्चा?" ("क्या आपने गंगा स्नान कर लिया?")।
- नए वस्त्र और आशीर्वाद: सभी लोग पिछली रात पूजा स्थान पर रखे गए नए वस्त्र पहनते हैं, और बच्चे बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
- दीपावली मरुंदु और मिठाइयाँ: पाचन के लिए एक चम्मच हर्बल लेहियम, उसके बाद मुरुक्कू, अधिरसम, लड्डू और घर में बने अन्य पकवान।
- मंदिर दर्शन: सुबह कुल-मंदिर के दर्शन; लिटिल इंडिया और पूरे द्वीप के मंदिरों में भारी भीड़ की अपेक्षा रखें।
- ओपन हाउस: सिंगापुर की यह प्रिय परंपरा, जिसमें दिन में बाद में हर समुदाय के मित्रों और पड़ोसियों का भोजन और शुभकामनाओं के लिए स्वागत किया जाता है।
- तलै दीपावली: नवविवाहित दंपती की पहली दीपावली, जो परंपरागत रूप से वधू के मायके में मनाई जाती है।
कई तमिल परिवार शाम को दीप भी जलाते हैं और लक्ष्मी-कुबेर पूजा करते हैं, और कुछ परिवार अमावस्या के आसपास केदार गौरी व्रतम् रखते हैं — अपने पारिवारिक कैलेंडर का पालन करें।
घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा: चरण-दर-चरण
सिंगापुर के उत्तर भारतीय, गुजराती, मारवाड़ी, सिंधी और कई अन्य परिवारों के लिए शाम की लक्ष्मी पूजा ही दीपावली का हृदय है: समृद्धि और कृपा की माता महालक्ष्मी का दीपों से स्वागत, जिसमें पहले गणेश जी की पूजा होती है।
सामग्री
- लाल वस्त्र से ढकी चौकी पर लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ या चित्र
- चावल पर रखा कलश, जिसमें जल, आम या पान के पत्ते और नारियल हों
- घी या तेल के दीये (कई तमिल घरों में कुत्तु विलक्कु), धूप, कपूर और घंटी
- कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल (कमल या चमेली) और माला
- नैवेद्य: खीर या पायसम, लड्डू, खील-बताशे और फल
- सिक्के, कुछ नकद राशि और व्यापारी परिवारों के लिए बही-खाते
पूजा
- तैयारी: घर साफ़ करें, द्वार पर कोलम या रंगोली बनाएँ, स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, और गणेश जी को लक्ष्मी जी के दाईं ओर (आपके बाईं ओर) विराजित करें।
- आचमन और दीप: तीन बार जल का आचमन करें, अपने ऊपर और सामग्री पर जल छिड़कें, और मुख्य दीप जलाएँ।
- संकल्प: हाथ में जल, चावल और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान ("सिंगापुर में"), दिन — कार्तिक अमावस्या, रविवार, 8 नवंबर 2026 — और अपनी प्रार्थना बोलें। जल को एक थाली में छोड़ दें।
- गणेश पूजा: "ॐ गं गणपतये नमः" के साथ कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
- कलश पूजा: कुमकुम और फूलों से कलश का पूजन करें।
- महालक्ष्मी का आवाहन: हाथ जोड़कर देवी का आवाहन करें, उनके चरणों के लिए जल अर्पित करें और मूर्ति को पंचामृत तथा शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
- अर्पण: चंदन, कुमकुम, अक्षत, फूल, माला, धूप और दीप अर्पित करें; सिक्के और बही-खाते उनके सामने रखकर उन पर कुमकुम लगाएँ।
- जप: "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 108 बार, या 11 या 21 बार जप करें।
- नैवेद्य और आरती: मिठाई और फल अर्पित करें, फिर दीप को दक्षिणावर्त घुमाते हुए "ॐ जय लक्ष्मी माता" गाएँ।
- समापन: किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें, बड़ों का आशीर्वाद लें, प्रसाद बाँटें और पूरे घर में दीप जलाएँ।
मंत्र और उनके अर्थ
- ॐ गं गणपतये नमः — "गणपति को नमस्कार", जो विघ्नहर्ता हैं।
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — "ॐ, मैं महालक्ष्मी को नमन करता/करती हूँ।" श्रीं लक्ष्मी जी का बीज मंत्र है — समृद्धि, सौंदर्य और मंगल की ध्वनि।
- ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् — लक्ष्मी गायत्री: "हम महालक्ष्मी को जानें; हम विष्णु की पत्नी का ध्यान करें; लक्ष्मी हमें प्रकाशित करें।"
- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा — धन के स्वामी कुबेर से, विवेकपूर्वक उपयोग की जाने वाली समृद्धि के लिए।
आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता; तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता। — "हे माता लक्ष्मी, आपकी जय हो; शिव, विष्णु और ब्रह्मा दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।" उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता — "आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं, जगत की माता।"
धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज
धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर: क्षीरसागर से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए दिव्य वैद्य भगवान धन्वंतरि का पूजन होता है, और लक्ष्मी जी के धन का स्वागत किया जाता है। परिवार सोना, चाँदी या नया बर्तन खरीदते हैं, 7:28 PM से 9:13 PM के बीच संक्षिप्त लक्ष्मी-कुबेर पूजा करते हैं, और परिवार की रक्षा के लिए द्वार के पास यम दीपम् — दक्षिण की ओर मुख वाला चार बत्तियों का दीया — रखते हैं।
गोवर्धन पूजा, मंगलवार 10 नवंबर: श्रीकृष्ण ने व्रज के लोगों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था; मंदिरों में अन्नकूट — शाकाहारी व्यंजनों का पर्वत — अर्पित किया जाता है, और गुजराती परिवार अपना नववर्ष मनाते हैं।
भाई दूज, बुधवार 11 नवंबर: बहनें तिलक लगाकर भाइयों की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं, जैसे यमुना ने यम के लिए किया था; बदले में भाई उपहार देते हैं।
सिंगापुर में दीपावली के लिए व्यावहारिक सुझाव
- सार्वजनिक अवकाश: दीपावली राजपत्रित सार्वजनिक अवकाश है। 8 नवंबर रविवार को होने के कारण, आमतौर पर उसके बाद वाले सोमवार को बदले में छुट्टी होती है — मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर की आधिकारिक सूची में पुष्टि करें।
- लिटिल इंडिया की रोशनी: सेरंगून रोड (Serangoon Road) के आसपास की सड़कें परंपरागत रूप से दीपावली से कई सप्ताह पहले रोशनी और तोरणों से सजाई जाती हैं, जहाँ उत्सव के स्टॉलों पर फूल, कपड़े, मिठाइयाँ और पूजा सामग्री बिकती है। आधिकारिक तिथियाँ और कार्यक्रम हर वर्ष घोषित होते हैं — पुरानी पोस्टों के बजाय आयोजकों की घोषणाएँ देखें। सबसे अधिक भीड़ से बचने के लिए किसी कार्यदिवस की शाम जाएँ, और MRT का उपयोग करें।
- पटाखे नहीं: सिंगापुर में पटाखों पर प्रतिबंध है। दीयों, कोलम और रोशनी के साथ उत्सव मनाएँ।
- HDB फ़्लैटों में दीये: तेल के दीयों को पर्दों से दूर, गर्मी-रोधी ट्रे पर रखें, उन्हें कभी भी बिना देखरेख के जलता न छोड़ें, और साझा गलियारों में न रखें।
- लंबा रविवार: भोर से पहले तेल-स्नान और 7 PM के बाद लक्ष्मी पूजा होने के कारण, बड़ों और बच्चों के लिए दोपहर में विश्राम की योजना बनाएँ।
सिंगापुर के मंदिर
सिंगापुर के पुराने प्रतिष्ठित मंदिर — जिनमें चाइनाटाउन (Chinatown) का श्री मरियम्मन मंदिर (Sri Mariamman Temple), तथा लिटिल इंडिया का श्री श्रीनिवास पेरुमाल मंदिर (Sri Srinivasa Perumal Temple) और श्री वीरमाकालियम्मन मंदिर (Sri Veeramakaliamman Temple) शामिल हैं — दीपावली पर विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं और 8 नवंबर की सुबह वहाँ बहुत भीड़ रहती है, जबकि उत्तर भारतीय मंदिरों में शाम को लक्ष्मी पूजा होती है। 2026 के समय के लिए हर मंदिर की अपनी सूचनाएँ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिंगापुर में दीपावली 2026 कब है?
सिंगापुर में दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। तमिल परिवार उस सुबह भोर से पहले तेल-स्नान (नरक चतुर्दशी) के साथ पर्व मनाते हैं, और उत्तर भारतीय परिवार उसी शाम लक्ष्मी पूजा करते हैं। धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को, गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को और भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है (सिंगापुर के लिए द्रिक पंचांग)।
दीपावली 2026 पर सिंगापुर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?
सिंगापुर में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त रविवार, 8 नवंबर 2026 को 7:19 PM – 9:13 PM SGT है, जो 6:50 PM – 9:13 PM के प्रदोष काल के भीतर आता है। यह सिंगापुर के लिए द्रिक पंचांग द्वारा प्रकाशित समय है।
क्या 2026 में दीपावली सिंगापुर में सार्वजनिक अवकाश है?
हाँ, दीपावली सिंगापुर में राजपत्रित सार्वजनिक अवकाश है। चूँकि 8 नवंबर 2026 रविवार को पड़ रहा है, इसलिए रविवार की छुट्टियों से जुड़े सिंगापुर के नियमों के अनुसार आमतौर पर अगले सोमवार को अवकाश रहता है। पुष्टि के लिए मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर (Ministry of Manpower) की 2026 की आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश सूची देखें।
क्या मैं भारत के लक्ष्मी पूजा समय में 2.5 घंटे जोड़कर सिंगापुर में उसका उपयोग कर सकता हूँ?
नहीं। भारत का मुहूर्त (नई दिल्ली में 5:54 PM – 7:50 PM IST) बदलने पर 8:24 PM – 10:20 PM SGT बनता है। यह सिंगापुर के सही मुहूर्त के आरंभ होने के एक घंटे से भी अधिक बाद शुरू होता है और स्थानीय प्रदोष काल की समाप्ति के बाद तक चलता है। सिंगापुर का मुहूर्त, 7:19 PM – 9:13 PM, ही अपनाएँ।
2026 में सिंगापुर में धनतेरस पूजा का मुहूर्त क्या है?
धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। सिंगापुर में धनतेरस पूजा का मुहूर्त 7:28 PM – 9:13 PM है, जो 6:50 PM – 9:13 PM के प्रदोष काल के भीतर आता है।
2026 में तमिल परिवारों को दीपावली का तेल-स्नान कब करना चाहिए?
पारंपरिक तेल-स्नान (गंगा स्नानम्) नरक चतुर्दशी को सूर्योदय से पहले किया जाता है, जो सिंगापुर में रविवार, 8 नवंबर 2026 की सुबह है — उसी दिन शाम को लक्ष्मी पूजा भी है। कई परिवार अपने तमिल पंचांगम् में दिए गए या अपने मंदिर द्वारा घोषित भोर से पहले के सटीक समय का पालन करते हैं।
संपादकीय टिप्पणी (5 अक्टूबर 2026): पर्व की तिथियाँ तथा लक्ष्मी पूजा और धनतेरस के मुहूर्त सिंगापुर के लिए द्रिक पंचांग द्वारा प्रकाशित मानों पर आधारित हैं; मुहूर्त प्रदोष काल और निरयण वृषभ लग्न का मेल है। लिटिल इंडिया की रोशनी की तिथियाँ और मंदिरों के कार्यक्रम अभी पुष्ट नहीं हैं — आयोजक अभी 2026 के पर्चे प्रकाशित कर रहे हैं; हम इस मार्गदर्शिका को अपडेट करेंगे।
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