धनतेरस 2026: तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, क्या खरीदें, धन्वंतरि जयंती और संपूर्ण मार्गदर्शिका
"ॐ धन्वंतरये नमः — ॐ श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" धनतेरस — धन और आरोग्य का पर्व — वह स्वर्णिम द्वार है…

"ॐ धन्वंतरये नमः — ॐ श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" धनतेरस — धन और आरोग्य का पर्व — वह स्वर्णिम द्वार है…
"ॐ धन्वंतरये नमः — ॐ श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
धनतेरस — धन और आरोग्य का पर्व — वह स्वर्णिम द्वार है जिससे पाँच दिवसीय भव्य दीपावली उत्सव का आरंभ होता है। इस दिन ब्रह्मांड में एक दुर्लभ त्रिविध आशीर्वाद का संयोग बनता है: देवी लक्ष्मी (धन) समुद्र से प्रकट होती हैं, भगवान धन्वंतरि (स्वास्थ्य और आयुर्वेद) अमृत कलश लेकर अवतरित होते हैं, और भगवान कुबेर (देवताओं के कोषाध्यक्ष) सभी सच्चे भक्तों को समृद्धि प्रदान करते हैं। हिंदू पंचांग का कोई अन्य पर्व भौतिक समृद्धि और शारीरिक स्वास्थ्य को धनतेरस की तरह एक ही पावन दिन में नहीं जोड़ता।
2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है — पाँच दिवसीय दीपावली पर्व का शुभ पहला दिन। HinduTone की यह संपूर्ण मार्गदर्शिका आपको सब कुछ बताती है — सटीक तिथियाँ, प्रदोष काल और वृषभ लग्न मुहूर्त, तीनों देवताओं की चरणबद्ध पूजा विधि, पावन धनतेरस व्रत कथा, क्या खरीदें (और किन चीज़ों से अवश्य बचें), यम दीपम विधि, शक्तिशाली मंत्र, क्षेत्रीय उत्सव और धनतेरस खरीदारी की पूरी जानकारी।
धनतेरस 2026 — तिथि और सभी प्रमुख समय
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 6 नवंबर 2026 को प्रदोष काल और वृषभ लग्न का संयोग शाम 6:02 PM से 7:57 PM IST (नई दिल्ली, द्रिक पंचांग) तक रहेगा, जो धनतेरस पूजा का सबसे शक्तिशाली समय है। वृषभ एक "स्थिर" लग्न है — इस समय लक्ष्मी पूजा करने से देवी का धन-आशीर्वाद आपके घर में अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रूप से स्थापित होता है।
धनतेरस 2026 शुक्रवार को क्यों है?
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है, क्योंकि यह पर्व हर वर्ष हिंदू मास कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (तेरहवीं तिथि) को मनाया जाता है। शुक्रवार के स्वामी शुक्र ग्रह हैं — जो वैभव, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि के ग्रह हैं — इसलिए यह धनतेरस धन-अनुष्ठानों, सोना खरीदने और लक्ष्मी पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ है।
धनतेरस क्या है? — अर्थ और त्रिविध महत्व
धनतेरस नाम दो शब्दों से मिलकर बना है — "धन" अर्थात संपत्ति और "तेरस" अर्थात तेरहवाँ दिन — यानी धन, समृद्धि और कल्याण को समर्पित तेरहवीं चंद्र तिथि।
धनतेरस को अद्वितीय रूप से शक्तिशाली बनाता है यह तथ्य कि इस दिन एक साथ तीन दिव्य घटनाओं का उत्सव मनाया जाता है:
- देवी लक्ष्मी का प्राकट्य (धन)
अमृत की खोज में देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान त्रयोदशी (तेरहवीं) तिथि को देवी लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुईं। इसीलिए धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा समस्त धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री के रूप में की जाती है। - भगवान धन्वंतरि का जन्म (स्वास्थ्य और आयुर्वेद)
भगवान विष्णु के अवतार भगवान धन्वंतरि देवताओं के दिव्य वैद्य और आयुर्वेद के जनक हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार वे समुद्र मंथन से अपनी चार भुजाओं में अमृत कलश, शंख, औषधियाँ और सुदर्शन चक्र धारण किए प्रकट हुए। यह दिन धन्वंतरि जयंती — उनके पावन जन्मोत्सव — के रूप में मनाया जाता है। पूरे भारत में अस्पताल, आयुर्वेदाचार्य और चिकित्सा जगत के लोग इस दिन विशेष पूजा करते हैं। - यमराज (मृत्यु के देवता) की प्रसन्नता
धनतेरस पर यम दीपम अनुष्ठान द्वारा मृत्यु के देवता यमराज का भी सम्मान किया जाता है। दक्षिण दिशा (यम की दिशा) में दीपक जलाकर और उनकी कृपा माँगकर भक्त पूरे वर्ष परिवार के सभी सदस्यों की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
पावन धनतेरस व्रत कथा — राजकुमार और सर्प
धनतेरस व्रत कथा एक ऐसे युवा राजकुमार की कहानी है जिसके भाग्य पर एक अशुभ भविष्यवाणी की छाया थी। उसके जन्म के समय राज ज्योतिषियों ने राजा हिम को चेताया कि उनके पुत्र की मृत्यु विवाह के चौथे दिन की रात सर्पदंश से होगी। जैसे-जैसे राजकुमार एक सुंदर युवक के रूप में बड़ा हुआ, राजा और रानी निरंतर भय में जीते रहे।
जब राजकुमार का विवाह हुआ, तो उसकी समर्पित युवा पत्नी को इस भविष्यवाणी के बारे में बताया गया। भक्ति के बल पर भाग्य को हराने का संकल्प लेकर, उसने विवाह के बाद की चौथी रात — सर्पदंश की भविष्यवाणी वाली रात — स्वयं मोर्चा संभाला।
उसने पूरी रात गीत गाकर, कहानियाँ सुनाकर और प्रार्थनाएँ करके अपने पति को जगाए रखा। कक्ष के प्रवेश द्वार पर उसने अपने सारे सोने के आभूषण, चाँदी के सिक्के और रत्नों का एक ऊँचा ढेर लगा दिया और उसके चारों ओर जलते हुए तेल के दीपक रख दिए, जिससे पूरा कक्ष जगमगा उठा।
जब यमदूत (यम के दूत) एक विषैले सर्प के रूप में आए, तो दीपकों के तेज प्रकाश और सोने-चाँदी की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं। वे कक्ष में प्रवेश नहीं कर सके। वे पूरी रात सोने-चाँदी के ढेर पर कुंडली मारकर बैठे रहे, नववधू के गीत और कहानियाँ सुनते रहे, और भोर होते ही राजकुमार के प्राण लिए बिना लौट गए।
धनतेरस कथा की सीख: भक्ति, प्रकाश और सोने-चाँदी की पावन शक्ति मृत्यु को भी जीत सकती है। इसीलिए:
- धनतेरस पर दीये जलाए जाते हैं
- इस दिन सोना और चाँदी खरीदा जाता है
- यमराज के सम्मान और प्रसन्नता के लिए दक्षिण दिशा की ओर यम दीपम जलाया जाता है
- रात भर प्रार्थना और भजन करते हुए जागरण करना पुण्यदायी माना जाता है
धनतेरस 2026 — संपूर्ण पूजा विधि (चरणबद्ध)
धनतेरस पूजा में तीन देवताओं — देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि — की एक साथ उपासना होती है, और प्रत्येक के लिए विशेष अनुष्ठान और भोग होते हैं।
पूजा सामग्री (संपूर्ण सूची)
प्रातःकालीन अनुष्ठान (6 नवंबर 2026)
चरण 1: जल्दी उठें, घर की सफ़ाई करें
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और पूरे घर — हर कमरे, हर कोने और भंडार — की गहरी सफ़ाई करें। हर कोने में गंगाजल छिड़कते हुए यह मंत्र बोलें:
"ॐ अपवित्रः पवित्रो वा, सर्वावस्थां गतोऽपि वा, यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः"
धनतेरस और दीपावली पर देवी लक्ष्मी केवल स्वच्छ, उजले और स्वागतपूर्ण घरों में ही पधारती हैं। कहा जाता है कि अव्यवस्था और गंदगी उनकी दिव्य उपस्थिति को दूर करती है।
चरण 2: प्रवेश द्वार सजाएँ
- मुख्य द्वार पर शुभ चिह्नों — कमल, स्वस्तिक, लक्ष्मी चरण — के साथ नई रंगोली बनाएँ।
- सभी दरवाज़ों पर आम के पत्तों के तोरण लटकाएँ।
- प्रवेश द्वार पर गेंदे की मालाएँ लगाएँ।
- मुख्य द्वार से भीतर की ओर कुमकुम से लक्ष्मी चरण बनाएँ — जो देवी के आपके घर में प्रवेश का प्रतीक है।
चरण 3: पूजा वेदी सजाएँ
- पीले या लाल कपड़े से ढकी लकड़ी की चौकी रखें।
- तीनों देवताओं की मूर्तियाँ/चित्र रखें: लक्ष्मी (बीच में), कुबेर (दाईं ओर), धन्वंतरि (बाईं ओर)।
- जल से भरा कलश रखें, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- सारी पूजा सामग्री एक थाली में सजाएँ।
- नए खरीदे गए सोने-चाँदी के सामान आशीर्वाद के लिए देवताओं के सामने रखें।
सायंकालीन पूजा विधि — प्रदोष काल (शाम 5:33 PM से, नई दिल्ली)
चरण 1: पहला दीया जलाना
सूर्यास्त के समय (नई दिल्ली में 5:33 PM) वेदी पर मुख्य घी का दीया और अखंड ज्योति जलाएँ। इससे धनतेरस पूजा का विधिवत आरंभ होता है।
चरण 2: यम दीपम — सबसे महत्वपूर्ण और अनूठा अनुष्ठान
यम दीपम शाम को दक्षिण मुखी दीपक जलाने की परंपरा है, जिससे अकाल मृत्यु और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा मिलती है। यह धनतेरस का सबसे अनूठा और महत्वपूर्ण अनुष्ठान है — जो वर्ष के किसी और दिन नहीं किया जाता।
यम दीपम कैसे करें:
- मिट्टी का एक बड़ा दीया (4 बत्ती वाला या एक बत्ती वाला) लें और उसमें सरसों या तिल का तेल भरें।
- इसे अपने घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा — यमराज की दिशा — की ओर मुख करके रखें।
- सूर्यास्त के बाद (नई दिल्ली में 5:33 PM) इसे जलाएँ और पूरी रात जलने दें।
- दीये के पास फूल, अक्षत और गुड़ अर्पित करें।
- श्रद्धापूर्वक प्रणाम करके प्रार्थना करें:
"मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह, त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यो प्रीतिमान् भवेत्" ("मृत्यु का पाश धारण करने वाले यमराज, काल के साथ, त्रयोदशी पर जलाए गए इस दीये से प्रसन्न हों — और सूर्यदेव भी प्रसन्न हों।")
मान्यता है कि यह दीपक जलाने से सभी बुराइयाँ दूर होती हैं और आने वाले पूरे वर्ष परिवार के किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती।
चरण 3: पूरे घर में 13 दीये जलाएँ
धनतेरस की शाम घर के भीतर 13 दीये और मुख्य द्वार पर 13 दीये जलाएँ, और एक अन्य दीपक (यम दीपम) पूरी रात जलता रहने दें।
चरण 4: संकल्प
वेदी के सामने बैठें, दाहिनी हथेली में जल लें और संकल्प करें:
"ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः — अद्य कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथौ, श्री महालक्ष्मी–कुबेर–धन्वंतरि पूजां करिष्ये"
चरण 5: गणेश पूजा (सदा सबसे पहले)
हर हिंदू पूजा का आरंभ भगवान गणेश के आवाहन से करें:
"ॐ गं गणपतये नमः — वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा"
लक्ष्मी–कुबेर पूजा (मुख्य धन अनुष्ठान)
आवाहन — देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करना:
"ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्"
पंचामृत अभिषेक: लक्ष्मी जी की मूर्ति को दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से स्नान कराएँ — फिर शुद्ध जल से धोएँ। साफ़ सफ़ेद कपड़े से पोंछें।
पुष्प और तुलसी अर्पण: देवी लक्ष्मी को कमल, गेंदा और तुलसी दल अर्पित करें। हर कमल अर्पित करते समय जपें:
"ॐ श्रीं ह्रीं कमलायै नमः"
श्री सूक्त पाठ: श्री सूक्त का पाठ करें — ऋग्वेद का 16 मंत्रों वाला वैदिक स्तोत्र, जो सबसे प्राचीन और प्रभावशाली लक्ष्मी स्तुति है। धनतेरस पर एक बार का पाठ भी आशीर्वाद को कई गुना बढ़ा देता है।
सोना-चाँदी अभिमंत्रण: नए खरीदे गए सभी सोने के आभूषण, चाँदी के सिक्के और बर्तन देवी के सामने रखें। हर वस्तु पर कुमकुम, हल्दी और एक फूल अर्पित करें। जपें:
"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
कुबेर पूजा:
संसार के समस्त धन की रक्षा करने वाले यक्षों के स्वामी भगवान कुबेर की धनतेरस पर सुख और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी के साथ पूजा की जाती है।
लक्ष्मी जी के पास कुबेर यंत्र या कुबेर का चित्र रखें। पीले फूल, पीली मिठाई और कपूर का दीपक अर्पित करें। कुबेर अष्टोत्तर (108 नाम) और मुख्य मंत्र का जाप करें:
"ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः — धनं धनं धनं कुरु कुरु स्वाहा"
"ॐ यक्षराजाय विद्महे, वैश्रवणाय धीमहि, तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्" (कुबेर गायत्री)
धन्वंतरि पूजा (स्वास्थ्य और आयुर्वेद अनुष्ठान)
भगवान धन्वंतरि देवताओं के दिव्य वैद्य हैं — उनके जन्मोत्सव (धन्वंतरि जयंती) पर उनकी पूजा स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगमुक्ति के लिए सबसे प्रभावशाली कर्म है।
भगवान धन्वंतरि का आवाहन:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय, सर्वभयविनाशाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः"
भगवान धन्वंतरि के लिए विशेष औषधीय अर्पण:
धन्वंतरि मंत्र का जाप करते हुए तुलसी दल, औषधियाँ और पंचामृत अर्पित करें — ये वनस्पति अर्पण विशेष रूप से धन्वंतरि से जुड़े हैं और अन्य देवताओं को सामान्यतः इस प्रकार अर्पित नहीं किए जाते।
अर्पित करें:
- ताज़ा तुलसी दल — विष्णु के सभी अवतारों को प्रिय
- नीम के पत्ते — आयुर्वेद की "गाँव की दवाखाना"
- हल्दी की गाँठ — स्वर्णिम उपचारक
- सूखा आँवला — आयुर्वेदिक औषधियों का राजा
- पान के पत्ते — दीर्घायु और अच्छे पाचन के लिए
धन्वंतरि स्तोत्र: धन्वंतरि स्तोत्र या ये प्रभावशाली श्लोक पढ़ें:
"शङ्खं चक्रं जलौकां च दधतो हरितालभौ, द्विभुजं वैद्यराजं तं वन्दे धन्वन्तरिम् अहम्" ("मैं दो भुजाओं वाले भगवान धन्वंतरि को प्रणाम करता हूँ, जो अपने हरित वर्ण हाथों में शंख, चक्र और जोंक धारण करते हैं — वैद्यों के राजा।")
स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना: हाथ जोड़कर प्रार्थना करें:
"हे भगवान धन्वंतरि, सभी रोगों और कष्टों को हरने वाले — मेरे परिवार को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, रोग-प्रतिरोधक शक्ति और सभी शारीरिक व मानसिक व्याधियों से मुक्ति का आशीर्वाद दें। इस वर्ष हमारे घर को कोई अकाल मृत्यु या रोग स्पर्श न करे।"
भव्य आरती और समापन
लक्ष्मी आरती: पाँच बत्ती वाली कपूर आरती को दक्षिणावर्त दिशा में मुख के सामने 7 बार और चरणों के सामने 4 बार घुमाएँ:
"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता"
कुबेर आरती:
"ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, धन के दातारे, सबकी इच्छा पूरी करो, आप ही दातारे"
प्रदक्षिणा और प्रणाम: वेदी की 3 बार परिक्रमा करें, फिर कृतज्ञता के साथ साष्टांग प्रणाम करें।
प्रसाद वितरण: परिवार के सभी सदस्यों में खीर, बताशे, फल और धन्वंतरि का विशेष औषधीय प्रसाद (आँवला, तुलसी, सोंठ) बाँटें।
धनतेरस 2026 खरीदारी मार्गदर्शिका — क्या और कब खरीदें
धनतेरस की खरीदारी केवल उपभोक्तावाद नहीं है — यह समृद्धि के स्वागत का एक पावन अनुष्ठान है। मान्यता है कि इस दिन धन से खरीदी गई वस्तु का मूल्य और सकारात्मक ऊर्जा तेरह गुना बढ़ जाती है।
खरीदने के लिए सबसे शुभ वस्तुएँ
- सोना और चाँदी (सर्वोच्च प्राथमिकता)
धनतेरस पर चाँदी के बर्तन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि चाँदी शीतलता देने वाले चंद्रमा का प्रतीक है, और संतोष रूपी धन मन में ही निवास करता है। लक्ष्मी–गणेश अंकित सोने-चाँदी के सिक्के सबसे लोकप्रिय खरीद हैं।
- सोने के आभूषण, चूड़ियाँ, चेन, अंगूठियाँ
- चाँदी के सिक्के, चाँदी की लक्ष्मी–गणेश मूर्तियाँ
- चाँदी की थाली, गिलास या छोटे बर्तन
- नए बर्तन और रसोई के सामान
इस दिन घर के पुराने या टूटे बर्तनों के स्थान पर नए बर्तन खरीदने चाहिए। पीतल, तांबे और स्टेनलेस स्टील के बर्तन सभी शुभ हैं। नए बर्तन घर लाना धन्वंतरि के आशीर्वाद के आगमन का प्रतीक है — क्योंकि वे दिव्य कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। - पीतल या तांबे का कलश (पावन पात्र)
धनतेरस पर नया पीतल या तांबे का कलश खरीदकर दीपावली की लक्ष्मी पूजा में उसका उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है — यह सीधे अमृत कलश के साथ धन्वंतरि के प्राकट्य की याद दिलाता है। - दीपावली पूजा के लिए लक्ष्मी–गणेश मूर्ति
अपनी दीपावली पूजा के लिए मिट्टी या पीतल की मुख्य लक्ष्मी–गणेश मूर्ति धनतेरस पर खरीदें — मुख्य दीपावली की रात (8 नवंबर) इसकी प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा की जाएगी। - दीये और दीपक
दीपावली की सजावट के लिए मिट्टी के नए दीये, सजावटी पीतल के दीपक और LED लाइट की लड़ियाँ खरीदें। तेल के दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है और घर में आशीर्वाद का स्वागत करता है। - इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (आधुनिक परंपरा)
आधुनिक भारत में धनतेरस इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वाहनों और संपत्ति की खरीदारी का सबसे बड़ा दिन बन गया है। माना जाता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वॉशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन टिकाऊपन और सौभाग्य से धन्य होते हैं। कार और दोपहिया वाहनों के शोरूम में रिकॉर्ड बिक्री होती है। - झाड़ू — दक्षिण भारतीय परंपरा
धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना समृद्धि का एक शक्तिशाली अनुष्ठान है — विशेषकर दक्षिण भारत में। झाड़ू स्वयं लक्ष्मी का प्रतीक है (वह दरिद्रता को बुहार देती हैं) और इसे धनतेरस पर पूजा घर में रखा जाता है, फिर दीपावली से पहले घर की सफ़ाई में इसका उपयोग होता है। - धनिये के बीज
इस अवसर पर लोग धनिये के बीज खरीदकर घर में रखते हैं। फिर दीपावली के बाद इन बीजों को अपने बगीचों या खेतों में बोया जाता है — यह एक सुंदर कृषि-आशीर्वाद अनुष्ठान है जो आने वाले वर्ष में नई वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।
धनतेरस पर क्या न करें
इन निषेधों का पालन करने से पर्व की पवित्रता और सौभाग्य बना रहता है:
धनतेरस पर मद्यपान और मांसाहार, धन उधार देने या लेने, और शारीरिक संबंधों से बचें।
धन्वंतरि जयंती 2026 — आयुर्वेद दिवस
धनतेरस को साथ ही धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है — दिव्य वैद्य और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का पावन जन्मोत्सव। 2016 से भारत सरकार ने धन्वंतरि जयंती को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस घोषित किया है।
भगवान धन्वंतरि कौन हैं?
भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार हैं — आयुर्वेद के जनक और आचार्य, तथा देवताओं के वैद्य। वे चार दिव्य वस्तुएँ धारण करते हैं: अमृत कलश, शंख, औषधियाँ और सुदर्शन चक्र।
इस त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से उनका प्राकट्य आयुर्वेद की ब्रह्मांडीय उत्पत्ति कथा है — वह प्राचीन भारतीय जीवन-विज्ञान जो औषधियों, आहार, योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य का निर्माण और संरक्षण करता है।
धन्वंतरि जयंती कैसे मनाएँ
- आयुर्वेदिक वैद्यों और चिकित्सकों से मिलें और उनका आशीर्वाद लें
- अस्पतालों और धर्मार्थ चिकित्सालयों को आयुर्वेदिक औषधियाँ दान करें
- कोई नई आयुर्वेदिक स्वास्थ्य दिनचर्या शुरू करें — ऑयल पुलिंग, अभ्यंग (तेल मालिश), त्रिफला सेवन, या रोज़ तुलसी और आँवला लेना
- सरकारी अस्पताल और आयुष मंत्रालय इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं
उत्तम स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि मंत्र
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः"
अर्थ: "मैं भगवान विष्णु के अवतार भगवान धन्वंतरि को प्रणाम करता हूँ — जो अमृत कलश धारण करते हैं, सभी भय और रोगों का नाश करते हैं, और तीनों लोकों के स्वामी हैं।"
स्वास्थ्य, उपचार और रोगमुक्ति के लिए धनतेरस पर इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
धनतेरस के 13 दीये — महत्व और स्थान
धनतेरस पर 13 दीये जलाना गहरे संख्यात्मक महत्व वाली एक पावन परंपरा है:
सभी 13 दीये तिल के तेल या घी से जलाने चाहिए — इन पावन स्थानों के लिए कभी भी कृत्रिम मोमबत्तियों का उपयोग न करें। घी के दीये आध्यात्मिक रूप से सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।
धनतेरस के शक्तिशाली मंत्र
महालक्ष्मी मंत्र (धन)
"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
स्थायी धन और भौतिक समृद्धि के लिए पूजा के दौरान 108 बार जाप करें।
कुबेर मंत्र (कोष का आशीर्वाद)
"ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं कुबेराय नमः"
व्यापार वृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए 108 बार जाप करें।
कुबेर धन प्राप्ति मंत्र
"ॐ यक्षराजाय विद्महे, वैश्रवणाय धीमहि, तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्"
शीघ्र धन संचय और आर्थिक बाधाएँ दूर करने के लिए।
धन्वंतरि मंत्र (स्वास्थ्य)
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये, अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय, त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः"
उत्तम स्वास्थ्य, रोगमुक्ति और परिवार के कल्याण के लिए जाप करें।
यम दीपम प्रार्थना (मृत्यु से रक्षा)
"मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह, त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यो प्रीतिमान् भवेत्"
अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए यम दीपम जलाते समय इसका पाठ किया जाता है।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
"ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्"
धनतेरस के पारंपरिक प्रसाद और पकवान
उत्तर भारत
- बताशे — लक्ष्मी पूजा का सबसे पारंपरिक प्रसाद
- मठरी — गेहूँ के आटे की खस्ता तली हुई नमकीन
- घेवर — चाशनी में डूबी जालीदार तली मिठाई
- खीर (केसर और मेवों वाली चावल की खीर)
महाराष्ट्र — धनतेरस का विशेष नैवेद्य
महाराष्ट्र में सूखे धनिये के बीजों के चूर्ण और गुड़ से नैवेद्य बनाने की एक अनूठी परंपरा है — यह भोग विशेष रूप से धनतेरस से जुड़ा है। यह सरल, मिट्टी से जुड़ा भोग पर्व को उसकी कृषि जड़ों से जोड़ता है।
दक्षिण भारत (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक)
- बोब्बट्लु / पूरन पोली — दाल-गुड़ भरी मीठी रोटी
- मुरुक्कु — चावल का कुरकुरा गोल नाश्ता
- रवा लड्डू — सूजी के लड्डू
- नीर मोर — मसालेदार छाछ का प्रसाद
गुजरात
- सुखड़ी (गोल पापड़ी) — गेहूँ का आटा, घी और गुड़
- मोहनथाल — बेसन की बर्फ़ी जैसी मिठाई
- चकली — चावल की कुरकुरी गोल नमकीन
धनतेरस 2026 — क्षेत्रीय उत्सव
उत्तर भारत — भव्य खरीदारी और यम दीपम की रात
उत्तर भारत में धनतेरस सबसे अधिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिल्ली, जयपुर, वाराणसी और लखनऊ के आभूषण बाज़ार सुबह से आधी रात तक खरीदारों से भरे रहते हैं। हर घर 13 दीयों से जगमगाता है, और गलियों में यम दीपम की परंपराएँ संध्या के समय हर मोहल्ले में मनमोहक सुनहरी आभा बिखेर देती हैं।
गुजरात — चोपड़ा पूजन की तैयारी और दीपावली पूर्व उत्सव
गुजरात में धनतेरस घर की गहन सफ़ाई और दीपावली की अंतिम खरीदारी का दिन है। व्यापारी वर्ग अपने नए बही-खातों (चोपड़ा) की तैयारी शुरू करता है — जिनका विधिवत उद्घाटन मुख्य दीपावली की रात होगा। सूरत और अहमदाबाद की सोने के आभूषणों की दुकानें धनतेरस पर वर्ष की सबसे अधिक बिक्री दर्ज करती हैं।
महाराष्ट्र — मराठी प्रधान पूजा
महाराष्ट्र में धन्वंतरि को विशेष महत्व दिया जाता है। परिवार इस राज्य का अनूठा पारंपरिक धनिया-गुड़ नैवेद्य बनाते हैं और घर की वेदियों तथा पुणे और मुंबई के धन्वंतरि मंदिरों में धन्वंतरि की विस्तृत पूजा करते हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना — दीपावली का आरंभ
तेलुगु राज्यों में धनतेरस से दीपावली के मौसम का वास्तविक आरंभ होता है। परिवार शाम को प्रदोष काल में तेल के दीपक जलाते हैं और लक्ष्मी–कुबेर पूजा करते हैं, और हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति की दीपों से सजी गलियाँ मुख्य दीपावली की रात से दो दिन पहले ही उत्सव की रोशनी से जगमगाने लगती हैं।
राजस्थान — धनतेरस मेला
पुष्कर, जयपुर और जोधपुर में भव्य धनतेरस मेले लगते हैं, जहाँ पारंपरिक सुनार, कुम्हार और कारीगर अपनी उत्कृष्ट कृतियाँ प्रदर्शित करते हैं। धनतेरस की रात राजस्थान के रंगीन बाज़ार अपने सबसे शानदार रूप में होते हैं।
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धनतेरस एक दीपक और कल्याण की प्रार्थना के साथ दीपावली के पाँच दिनों का आरंभ करता है। जैसा कि प्रचलित है, भगवान धन्वंतरि आरोग्य का अमृत लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए, और माँ लक्ष्मी अपनी कृपा के साथ प्रकट हुईं। आज शाम हम जो पहला दीया जलाते हैं, वह याद दिलाता है कि सच्चा धन स्वास्थ्य, शांत मन और अंधकार को दूर करने वाले भीतरी प्रकाश से शुरू होता है। धनतेरस 2026 पर अपने परिवार और प्रियजनों के साथ अच्छे स्वास्थ्य और कृतज्ञता का आशीर्वाद साझा करें।
दीप श्लोक: दीपक की प्रार्थना
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसम्पदा, शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते।
अर्थ: मैं दीपक की ज्योति को प्रणाम करता हूँ, जो शुभ और कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा लाती है, तथा दुर्भावना का नाश करती है। कई परिवार शाम का दीया जलाते समय इसका पाठ करते हैं।
दीपावली के लिए लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
अर्थ: महालक्ष्मी को नमस्कार। "श्रीं" पारंपरिक रूप से लक्ष्मी से जुड़ा बीज मंत्र है।
साझा करने के लिए दीपावली 2026 संदेश
🪔 धनतेरस की शुभकामनाएँ! भगवान धन्वंतरि हमारे परिवार को उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद दें, और माँ लक्ष्मी इस दीपावली 2026 पर हमारे घर को शांति, कृतज्ञता और प्रकाश से भर दें ✨ WhatsApp पर साझा करें
🙏 हमारे प्रिय माता-पिता और बड़ों के लिए: आपका स्वास्थ्य ही हमारा सबसे बड़ा धन है। इस धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि आपको शक्ति, ऊर्जा और लंबा, शांतिपूर्ण जीवन दें 🪔 WhatsApp पर साझा करें
✨ धनतेरस की शुभकामनाएँ, प्रिय मित्र! दीपों का पर्व शुरू होते ही आपके दिन अच्छे स्वास्थ्य, खुशी के पलों और उजले मन से भरे रहें 🌸 WhatsApp पर साझा करें
🪔 आपको और आपके परिवार को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पर्व हम सब मिलकर जो कुछ भी बनाते हैं, उसमें कल्याण, ईमानदार परिश्रम और स्थिर सद्भाव लाए 🙏 WhatsApp पर साझा करें
🌸 जय माँ लक्ष्मी! धनतेरस पर हम आपके लिए पहला दीया जलाते हैं। आपकी कृपा हर घर में संतोष, स्वास्थ्य और दया लाए 🪔✨ WhatsApp पर साझा करें
🙏 विघ्नहर्ता श्री गणेश, इस धनतेरस पर मेरे परिवार के लिए अच्छे स्वास्थ्य और सही प्रयास का मार्ग प्रशस्त करें, और आगे आने वाले दीपावली के पाँच दिनों को आशीर्वाद दें 🪔 WhatsApp पर साझा करें
दीपावली की एक छोटी प्रार्थना
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश, इस धनतेरस पर मैं एक दीपक जलाकर कृतज्ञ हृदय से आपके सामने नतमस्तक हूँ। जैसे भगवान धन्वंतरि सबको आरोग्य देते हैं, वैसे ही मेरे परिवार को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद दें। मेरे मन से आलस्य और भय की बाधाएँ दूर करें। हमारे घर में सद्भाव बनाए रखें, जो मेरे पास पहले से है उसका मूल्य समझने में मेरी सहायता करें, और मुझे ईमानदारी और सही प्रयास से काम करने तथा जो कुछ मिले उसे ज़रूरतमंदों के साथ बाँटने का मार्ग दिखाएँ।
ये आशीर्वाद अपने परिवार और मित्रों को भेजने के लिए इस पेज पर दिए गए शेयर बटन का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — धनतेरस 2026
प्र1. धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 AM पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 AM पर समाप्त होगी।
प्र2. 2026 में धनतेरस पूजा का मुहूर्त क्या है?
धनतेरस 2026 का सर्वश्रेष्ठ पूजा मुहूर्त प्रदोष काल में शाम 5:33 PM से 8:09 PM तक है, जिसमें वृषभ (स्थिर) काल नई दिल्ली में 6:02 PM से 7:57 PM IST तक है (द्रिक पंचांग)। सर्वोत्तम समय 6:02 PM – 7:57 PM है; अन्य शहरों में स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार समय अलग होता है।
प्र3. धनतेरस 2026 पर सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय क्या है?
सोना-चाँदी खरीदने का सबसे शुभ समय प्रदोष काल है — 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में शाम 5:33 PM से 8:09 PM IST तक। राहु काल (नई दिल्ली में 10:42 AM – 12:04 PM) में खरीदारी से बचें।
प्र4. धन्वंतरि जयंती क्या है?
धन्वंतरि जयंती दिव्य वैद्य और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि का जन्मोत्सव है, जो अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। यह धनतेरस के साथ ही आती है — 6 नवंबर 2026।
प्र5. यम दीपम क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यम दीपम शाम को दक्षिण मुखी दीपक जलाने की परंपरा है, जिससे अकाल मृत्यु और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा मिलती है। यह धनतेरस का सबसे अनूठा अनुष्ठान है — जो केवल इसी दिन किया जाता है — और इसकी जड़ें धनतेरस व्रत कथा में हैं, जिसमें युवा राजकुमार को उसकी पत्नी की भक्ति ने बचाया।
प्र6. क्या धनतेरस 2026 पर वाहन खरीद सकते हैं?
हाँ! धनतेरस पर नए वाहन (कार, दोपहिया) खरीदना एक बेहद लोकप्रिय आधुनिक परंपरा है और इसे बहुत शुभ माना जाता है — पहली बार चलाने से पहले नए वाहन को लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के सामने रखकर उसका पूजन किया जाता है।
प्र7. धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
लोहे या स्टील का कबाड़, काली वस्तुएँ, कैंची, चाकू और तेल खरीदने से बचें, क्योंकि इन्हें अशुभ खरीद माना जाता है। इस दिन उधार लेने या कर्ज़ चुकाने से भी बचें।
प्र8. क्या धनतेरस पर व्रत रखा जाता है?
धनतेरस पर व्रत ऐच्छिक है। कई भक्त शाम की धन्वंतरि पूजा तक सादा व्रत रखते हैं, जबकि अन्य सामान्य भोजन और भक्ति के साथ दिन मनाते हैं।
प्र9. धनतेरस पर बर्तन क्यों खरीदे जाते हैं?
नए बर्तन खरीदने की परंपरा भगवान धन्वंतरि के पावन अमृत कलश के साथ प्रकट होने की कथा से जुड़ी है। इस दिन घर में नए पात्र लाना आपके जीवन को स्वास्थ्य और समृद्धि के दिव्य अमृत से भरने का प्रतीक है।
प्र10. धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए?
परंपरा के अनुसार घर के भीतर 13 दीये और मुख्य द्वार पर 13 दीये जलाए जाते हैं, साथ ही प्रवेश द्वार पर दक्षिण की ओर मुख करके एक यम दीपम पूरी रात जलाया जाता है।
प्र11. धनतेरस और दीपावली का क्या संबंध है?
धनतेरस पाँच दिवसीय दीपावली पर्व का पहला दिन है — वह पावन शुरुआत जो आगे के सभी उत्सवों का स्वर तय करती है: छोटी दीपावली (7 नवंबर), मुख्य दीपावली/लक्ष्मी पूजा (8 नवंबर), गोवर्धन पूजा (9 नवंबर) और भाई दूज (10 नवंबर)।
प्र12. क्या यम दीपम घर के अंदर रखा जा सकता है?
नहीं। यम दीपम घर के बाहर, मुख्य प्रवेश द्वार या फाटक पर, दक्षिण की ओर मुख करके रखना चाहिए। इसे विशेष रूप से बाहर से दिखाई देने के लिए रखा जाता है — यमराज के लिए एक संकेत कि इस घर के निवासी उनका सम्मान करते हैं और उनकी रक्षा चाहते हैं।
अंतिम आशीर्वाद — शुभ धनतेरस 2026!
धनतेरस यह दिव्य स्मरण है कि धन और स्वास्थ्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं — वे एक ही ब्रह्मांडीय उदारता के जुड़वाँ उपहार हैं। भगवान धन्वंतरि जीवन का अमृत लाते हैं; देवी लक्ष्मी उसे पूर्णता से जीने की समृद्धि लाती हैं; भगवान कुबेर सुनिश्चित करते हैं कि कोष कभी खाली न हो। ये तीनों मिलकर उस हिंदू समझ को दर्शाते हैं कि सच्चे धन्य जीवन के लिए तीनों आवश्यक हैं।
इस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को, जब आप अपना घर साफ़ करें, दीपक जलाएँ और पावन पूजा करें — याद रखें कि देवी लक्ष्मी को सबसे अधिक आकर्षित करने वाला सोना या चाँदी नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, कृतज्ञ भाव और भक्ति के प्रकाश से भरा घर है।
आपके 13 दीये उज्ज्वल जगमगाएँ। यम दीपम आपके सभी प्रियजनों की रक्षा करे। भगवान धन्वंतरि आपके परिवार को उत्तम स्वास्थ्य दें। देवी लक्ष्मी कभी आपकी देहरी न छोड़ें। भगवान कुबेर आपके कोष को समृद्धि से भर दें।
शुभ धनतेरस 2026! शुभ दीपावली!
प्रस्तुति: HinduTone — हिंदू पर्वों, अनुष्ठानों, मंत्रों और आध्यात्मिक जीवन के लिए आपकी संपूर्ण मार्गदर्शिका।
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